केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वायनाड टनल भूस्खलन में मारे गए लोगों के परिवारों और घायलों को समय पर मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि जब निर्माण स्थल पर काम पूरी तरह रोकने के आदेश जारी हो चुके थे, तो वहां मजदूरों की मौजूदगी का क्या कारण था।
जस्टिस ए. के. जयशंकरण नांबियार और जस्टिस प्रीता ए. के. की पीठ ने निर्देश दिया कि मृतकों के शवों को बिना किसी अनावश्यक देरी के उनके परिवारों को सौंप दिया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़ितों को दिए जाने वाले अंतरिम मुआवजे और घायलों के इलाज का खर्च फिलहाल के लिए टनल प्रोजेक्ट के खाते में डाला जा सकता है, और इस राशि की अंतिम वसूली किससे की जाएगी, इसका फैसला बाद में होगा।
कामबंदी के बाद भी मजदूरों की मौजूदगी पर सवाल
सुनवाई के दौरान टनल साइट पर काम रोकने के आदेशों की समयसीमा का विवरण देते हुए सरकार ने बताया कि 25 मई को बाहरी कामों को छोड़कर बाकी सभी गतिविधियों को बंद करने का आदेश दिया गया था। इसके बाद, 5 जुलाई को पूरी तरह से काम रोकने (स्टॉप-वर्क) का निर्देश जारी किया गया।
इस पर हाईकोर्ट की पीठ ने सवाल उठाया कि जब 5 जुलाई को ही काम पूरी तरह बंद करने का आदेश दे दिया गया था, तो दो दिन बाद यानी 7 जुलाई को हादसे के वक्त मजदूर निर्माण स्थल पर क्या कर रहे थे? कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख तक सरकार से औपचारिक स्पष्टीकरण मांगा है।
कीचड़ के चलते खोजी कुत्तों की जगह मानवीय श्रम से तलाश
राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि टनल साइट पर भारी मलबे और कीचड़ की वजह से खोजी कुत्ते (कैडवर डॉग्स) लापता लोगों का पता लगाने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। इसी कारण लापता लोगों की तलाश के लिए मानवीय श्रम (मैनुअल लेबर) का उपयोग किया जा रहा है।
शुक्रवार को मलबे से एक और शव बरामद होने के बाद इस हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। यह भूस्खलन बीती 7 जुलाई को अनाक्कमपोयिल-मेप्पाडी टनल प्रोजेक्ट के निर्माण स्थल पर हुआ था, जो कोझिकोड और वायनाड जिलों को आपस में जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है।
साल 2024 की स्वतः संज्ञान याचिका के तहत सुनवाई
हाईकोर्ट ने ये निर्देश अपनी उस स्वतः संज्ञान याचिका के तहत जारी किए हैं, जिसे अदालत ने साल 2024 में केरल में प्राकृतिक आपदाओं के बेहतर प्रबंधन और रोकथाम के उद्देश्य से शुरू किया था। यह याचिका जुलाई 2024 में वायनाड के मुंडक्कई और चूरलमाला गांवों में आए भीषण भूस्खलन के बाद दायर की गई थी, जिसमें 200 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

