गुरुग्राम प्रोजेक्ट में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पार्श्वनाथ डेवलपर्स के बैंक खाते फ्रीज और निदेशकों के खिलाफ वारंट जारी

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में फ्लैट मिलने में हुई लगभग दो दशक की देरी और घर खरीदारों के लंबे संघर्ष को बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने सोमवार को सख्त कदम उठाते हुए रियल एस्टेट कंपनी पार्श्वनाथ डेवलपर्स और उसकी सहयोगी कंपनी के बैंक खाते फ्रीज करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही कंपनी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ जमानती वारंट भी जारी किए गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर बिल्डर के साथ साठगांठ का गंभीर संदेह जताया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने इन कड़े उपायों का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड और पार्श्वनाथ हेस्सा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के कॉर्पोरेट खातों को तुरंत फ्रीज करने के लिए कहा है। यह रोक कंपनी के निदेशकों और प्रबंध निदेशकों के निजी बैंक खातों पर भी लागू होगी। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कंपनी के अधिकारी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाएंगे।

कैंसर सर्वाइवर का 20 साल लंबा इंतजार

यह पूरा मामला गुरुग्राम के सेक्टर 53 में स्थित “पार्श्वनाथ एक्सोटिका” प्रोजेक्ट से जुड़ा है। कैंसर से उबर चुकीं रीता टिक्कू और लोकेश टिक्कू ने इस आवासीय परियोजना में फ्लैट बुक कराने के लिए अपनी जीवनभर की कमाई लगा दी थी। याचिकाकर्ताओं को साल 2006 में इस प्रोजेक्ट में फ्लैट आवंटित किया गया था, जिसके बाद साल 2007 की शुरुआत में फ्लैट खरीदार समझौता हुआ था।

खरीदारों ने फ्लैट की पूरी कीमत के तौर पर लगभग 1.78 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया था। समझौते के तहत बिल्डर को साल 2013 में फ्लैट का कब्जा सौंपना था। हालांकि, आवंटन के 20 साल बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट आज तक अधूरा पड़ा है और खरीदारों को अपने घर का इंतजार है।

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सरकारी तंत्र की निष्क्रियता और मिलीभगत पर नाराजगी

याचिकाकर्ताओं ने साल 2021 में हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (हरेरा) से अपने पक्ष में हर्जाने का आदेश हासिल किया था। इसके बावजूद बिल्डर ने न तो इस आदेश के खिलाफ कोई कानूनी अपील की और न ही खरीदारों को मुआवजा दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अदालती आदेशों को लागू कराने की प्रक्रिया अब केवल एक औपचारिक औपचारिकता बनकर रह गई है, क्योंकि हरेरा द्वारा जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी बताया गया कि एक मौके पर जब कोर्ट का बेलिफ (अदालती आदेश तामील कराने वाला अधिकारी) कार्रवाई के लिए बिल्डर के परिसर में दाखिल होने की कोशिश कर रहा था, तो उसे जबरन रोक दिया गया। इस दौरान स्थानीय पुलिस ने भी अधिकारी को कोई सहायता नहीं दी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह साफ तौर पर दिखाता है कि जिला कलेक्टरों और स्थानीय पुलिस ने या तो बिल्डरों के साथ साठगांठ कर रखी है या वे अपने कर्तव्यों का पालन करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।

नए खरीदार बनाने पर रोक और अनुपालन के निर्देश

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अदालत ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स पर किसी भी तरह के थर्ड-पार्टी अधिकार बनाने या अगले आदेश तक फ्लैटों का कब्जा किसी अन्य को सौंपने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस कमिश्नरों को सोमवार को जारी इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इन सभी शीर्ष अधिकारियों को इस मामले में की गई कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कोर्ट में अपना हलफनामा भी जमा करना होगा

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