राम मंदिर चंदा हेराफेरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जांच टीम से मांगी प्रगति रिपोर्ट, मंदिर ट्रस्ट को नोटिस

अयोध्या के राम मंदिर में चंदे की कथित हेराफेरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को इस मामले में अब तक की जांच की प्रगति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने मंदिर की व्यवस्था देखने वाले ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को भी औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने चंदे की कथित चोरी और वित्तीय गड़बड़ियों की समयबद्ध जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया।

सीबीआई जांच और स्वतंत्र ऑडिट की मांग

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें मंदिर के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर चिंता जताई गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह की याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने और मंदिर ट्रस्ट के पूरे वित्तीय लेनदेन का व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है।

एक अन्य याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने भी शीर्ष अदालत का रुख करते हुए इस पूरे विवाद की सीबीआई जांच कराने और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा ट्रस्ट के खातों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की अपील की है।

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वहीं, वकीलों अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दायर तीसरी संयुक्त याचिका में भी वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों की जांच के लिए सीबीआई के नेतृत्व में एक बहु-विषयक एसआईटी गठित करने की मांग की गई है।

राज्य सरकार की जांच पर उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्तमान में कराई जा रही जांच की निष्पक्षता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। वकीलों अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने अदालत का ध्यान इस ओर खींचा कि राज्य सरकार की एसआईटी ने बिना कोई एफआईआर दर्ज किए या औपचारिक आपराधिक मामला दर्ज किए ही अपनी जांच शुरू कर दी है।

याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट को एक ऐसी मजबूत नियामक, पर्यवेक्षी और ऑडिट प्रणाली तैयार करने का निर्देश दे, जिससे सार्वजनिक हित की रक्षा की जा सके और चंदा देने वालों का विश्वास बना रहे।

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करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का हवाला

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, चंदे में गड़बड़ी और पैसों के गायब होने के आरोपों से सीधे तौर पर करोड़ों भक्तों की भावनाएं आहत हो रही हैं। याचिका में कहा गया है कि इन अपुष्ट रिपोर्टों ने भी उन लोगों को गहरी ठेस पहुंचाई है जिन्होंने पीढ़ियों तक अयोध्या के गौरव को बहाल करने के लिए संघर्ष किया है।

इससे पहले, आंशिक कार्य दिवस के दौरान जस्टिस बी वी नागरथना की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को इस मामले की त्वरित सुनवाई के लिए बाद की किसी तिथि पर उल्लेख करने को कहा था।

यूपी सरकार की वर्तमान एसआईटी का ढांचा

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गौरतलब है कि राम मंदिर में चंदे के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद खुद मंदिर ट्रस्ट ने जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बीती 13 जून को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। इस जांच टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं।

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