सुप्रीम कोर्ट ने जजों के पर्सनल असिस्टेंट की नियुक्तियां रद्द करने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के जजों के 17 पर्सनल असिस्टेंट (पीए) की नियुक्तियां रद्द करने वाले फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रभावित कर्मी फिलहाल अपने पदों पर काम करना जारी रख सकेंगे। यह राहत सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने नौ याचिकाकर्ता कर्मियों की अपील पर सुनवाई करते हुए दी। यह अपील मद्रास हाईकोर्ट की डिविजन बेंच द्वारा 1 जुलाई को दिए गए उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें पूरी चयन प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया गया था।

हाईकोर्ट का फैसला और नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोप

मद्रास हाईकोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह अवैध घोषित कर दिया था। हाईकोर्ट के जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस एन सेंथिलकुमार की बेंच ने फरवरी 2024 में इस मामले में स्वतः संज्ञान (suo motu) लिया था। हाईकोर्ट ने पाया कि यह भर्ती मद्रास हाईकोर्ट सर्विस रूल्स, 2015 के नियम 14A का उल्लंघन करती है।

हाईकोर्ट के अनुसार, इस भर्ती में तय उम्र से अधिक और कम योग्यता वाले उम्मीदवारों को शामिल होने की अनुमति दी गई। कुछ ऐसे उम्मीदवारों को भी सशर्त नियुक्त कर दिया गया जो जरूरी स्किल टेस्ट पास नहीं कर पाए थे। वहीं कुछ उम्मीदवारों को इंग्लिश शॉर्टहैंड की सीनियर ग्रेड योग्यता हासिल करने के लिए दो साल का समय दिया गया। हाईकोर्ट का मानना था कि आवेदन मंगाते समय ही सर्कुलर के जरिए नियमों में ढील देना समानता के सिद्धांत के खिलाफ था और यह मनमाना कदम था।

इसके अलावा, हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मदुरै बेंच के एक असिस्टेंट रजिस्ट्रार पर परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों की मदद करने के आरोपों का भी जिक्र किया था। कोर्ट ने पाया कि ट्रांसक्रिप्शन टेस्ट में शून्य अंक पाने वाले उम्मीदवारों का भी चयन कर लिया गया था। साथ ही, इस भर्ती को केवल सेवा में मौजूद (in-service) कर्मचारियों तक सीमित रखने और आम जनता के लिए आवेदन न खोलने को भी हाईकोर्ट ने गलत माना था।

नियमों में ढील देने के पक्ष में याचिकाकर्ताओं की दलीलें

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2015 के सेवा नियमों के नियम 28 को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। यह नियम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को विशेष परिस्थितियों में योग्यता शर्तों में ढील देने का अधिकार देता है।

READ ALSO  यूपी: POCSO कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म, दोहरे हत्याकांड में किशोर को उम्रकैद की सजा दी

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि तत्कालीन कार्यकारी चीफ जस्टिस ने जजों के पर्सनल असिस्टेंट की भारी कमी को देखते हुए नियमों में ढील दी थी। इसके तहत यह शर्त रखी गई थी कि नियुक्त कर्मियों को दो साल के भीतर अपनी योग्यता पूरी करनी होगी, अन्यथा उन्हें उनके मूल पदों पर वापस भेज दिया जाएगा। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वे अब सभी आवश्यक योग्यताएं हासिल कर चुके हैं और अपने पदों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा सेवा मामलों में स्वतः संज्ञान लेने पर भी सवाल उठाया, खासकर तब जब किसी भी असफल उम्मीदवार या प्रभावित पक्ष ने इस भर्ती को चुनौती नहीं दी थी।

READ ALSO  गुजरात हाईकोर्ट में 999 रिक्त पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू, अप्लाई करें !
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles