मद्रास हाईकोर्ट ने इंस्टाग्राम पर छात्राओं की मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) और अश्लील तस्वीरें पोस्ट करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत दे दी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस के. राजशेखर ने 8 जुलाई को यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर गौर किया कि आरोपी का मोबाइल फोन पुलिस पहले ही जब्त कर चुकी है और वह एक निश्चित अवधि तक हिरासत में रह चुका है।
यह मामला तब सामने आया जब कॉलेज की एक आंतरिक समिति ने शिकायत की जांच की और उसमें इस आरोपी की संलिप्तता पाई। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को 21 जून, 2026 को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वह लगातार हिरासत में था। आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कानून के तहत पहचान की चोरी, अश्लील सामग्री का प्रसारण और यौन स्पष्ट कृत्यों के आरोप हैं। इसके साथ ही, उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के मामले भी दर्ज किए गए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि और आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस मामले में आरोपी का एक दोस्त भी शामिल है, जो पीड़ित छात्राओं के ही कॉलेज में पढ़ता है। इस सह-आरोपी दोस्त ने अपनी सहपाठियों की तस्वीरें मुख्य आरोपी को भेजी थीं। इसके बाद आरोपी ने उन तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उन्हें अश्लील बनाया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया।
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील टी. एंथनी अरुलराज ने दलील दी कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। वकील ने दावा किया कि याचिकाकर्ता ने खुद इन तस्वीरों से कोई छेड़छाड़ नहीं की थी, बल्कि उसने केवल सह-आरोपी द्वारा भेजी गई तस्वीरों को आगे साझा किया था। बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि पुलिस इंटरनेट से इन आपत्तिजनक तस्वीरों को पहले ही हटा चुकी है और आरोपी जमानत की सभी शर्तों का पूरी तरह पालन करने के लिए तैयार है।
दूसरी ओर, सरकारी वकील एन. बालसुब्रमण्यम ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आरोपी ने इन अश्लील तस्वीरों को बड़े पैमाने पर प्रसारित करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को यह भी बताया कि इस मामले की जांच अभी जारी है और तस्वीरें भेजने वाला सह-आरोपी दोस्त फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
जमानत की शर्तें और कानूनी चेतावनी
जस्टिस राजशेखर ने आरोपी को सशर्त राहत देते हुए निर्देश दिया कि वह इस मामले से जुड़े किसी भी गवाह या पीड़ित को न तो प्रभावित करेगा और न ही किसी तरह की धमकी देगा। कोर्ट ने आरोपी को 15,000 रुपये का निजी मुचलका भरने और दो जमानतदार पेश करने का आदेश दिया। इसके साथ ही, उसे अगले चार हफ्तों तक हर रोज पुलिस स्टेशन जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
हाईकोर्ट ने साफ तौर पर सचेत किया कि यदि आरोपी इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है, तो निचली अदालत या न्यायिक मजिस्ट्रेट उसके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जमानत मिलने के बाद आरोपी भागने या गायब होने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 269 के तहत एक नया मामला दर्ज किया जा सकता है।

