केरल हाईकोर्ट का फैसला: सीबीएसई री-इवैल्यूएशन अंकों के आधार पर सुधरेगी तीन छात्रों की कीम रैंक, दूसरे दौर से मिलेगा फायदा

केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्य के प्रवेश परीक्षा प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के कक्षा 12 के तीन छात्रों के पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) के बाद आए संशोधित अंकों को स्वीकार करे। कोर्ट के इस फैसले से इन छात्रों को केरल इंजीनियरिंग आर्किटेक्चर मेडिकल (कीम – KEAM) प्रवेश परीक्षा की रैंक लिस्ट में सुधार का मौका मिलेगा। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संशोधित रैंक का लाभ केवल दूसरे काउंसलिंग दौर से ही मिलेगा और पहले दौर के आवंटन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। याचिकाकर्ताओं में एक छात्र संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का रहने वाला है।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, प्रवेश परीक्षा आयुक्त को 13 जुलाई की दोपहर 12:30 बजे तक इन तीनों छात्रों के नए अंक स्वीकार करने होंगे और इसके बाद ‘कीम’ की रैंक सूची को नए सिरे से तैयार करना होगा। अदालत ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस आदेश का लाभ केवल इन तीन याचिकाकर्ता छात्रों को ही मिलेगा और किसी भी परिस्थिति में किसी अन्य उम्मीदवार को इस समय सीमा के बाद अंक अपलोड करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी गड़बड़ियां

छात्रों ने हाईकोर्ट का रुख तब किया था जब 27 जून को कीम की रैंक लिस्ट जारी होने के बाद सीबीएसई ने उनके पुनर्मूल्यांकन के परिणाम घोषित किए। छात्रों का तर्क था कि सीबीएसई की शुरुआती कॉपियों को जांचने की प्रक्रिया में हुई गंभीर गड़बड़ियों के कारण उनके मूल अंक काफी कम आए थे, जिससे उनकी कीम रैंक पर बुरा असर पड़ा था।

इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि यह एक असाधारण मामला है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस साल सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया में कॉपियों की अदला-बदली और नए डिजिटल स्कैनिंग सिस्टम के कारण धुंधली स्कैन की गई शीट जैसी कई तकनीकी खामियां सामने आई थीं। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक और तकनीकी कमियों का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए, विशेषकर तब जब उन्होंने बिना किसी देरी के कानूनी मदद ली हो।

प्रशासनिक व्यवस्था से ऊपर छात्रों की योग्यता

राज्य सरकार ने इन याचिकाओं का कड़ा विरोध किया था। सरकारी प्रतिनिधियों का कहना था कि राज्य पहले ही सीबीएसई छात्रों की सुविधा के लिए अंक अपलोड करने की अंतिम तिथि को दो बार बढ़ा चुका था, जो अंततः 23 जून को समाप्त हो गई थी। सरकार ने दलील दी कि 8 जुलाई से सीट आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद पूरी रैंक सूची को दोबारा बदलना राज्यभर के दाखिले के तय शेड्यूल को प्रभावित करेगा और इससे व्यवस्था बिगड़ जाएगी।

READ ALSO  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने पराली जलाने के मामलों में किसानों का प्रतिनिधित्व करने से किया इनकार

हालांकि, हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि हालांकि राज्य स्तर पर दाखिला प्रक्रिया का प्रबंधन करना एक बेहद जटिल और कठिन कार्य है, लेकिन केवल प्रशासनिक कठिनाइयों के आधार पर योग्य छात्रों की योग्यता (मेरिट) के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जिन होनहार छात्रों ने समय रहते अपनी समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए हैं, वे राहत पाने के हकदार हैं।

READ ALSO  पति द्वारा पत्नी को मराठी भाषा में पागल कहना अपने आप में दुर्व्यवहार नहीं: बॉम्बे हाई कोर्ट
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles