गबन के मामले में फंसे बैंक कैशियर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अंतरिम अग्रिम जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में जस्टिस श्री प्रकाश सिंह ने गबन के एक मामले में आरोपी बैंक कैशियर को अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी है। राज्य सरकार की आपत्तियों के बावजूद, कोर्ट ने आगे की सुनवाई होने तक आवेदक विकास पांडेय को यह अस्थायी राहत प्रदान की है।

पृष्ठभूमि और दलीलें

यह मामला अंबेडकर नगर जिले के कोतवाली टांडा पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज केस क्राइम नंबर 0031 ऑफ 2026 से जुड़ा है।

आवेदक के वकील अखंड कुमार पांडेय और अभिषेक सिंह ने दलील दी कि विकास पांडेय का नाम एफआईआर में नहीं है, और न ही मुख्य आरोपी उमैर अहमद के शुरुआती बयानों में उनका कोई जिक्र था। बचाव पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि पांडेय का नाम अहमद के तीसरे बयान में सामने आया। वकीलों ने कोर्ट को बताया कि गबन की गई कथित राशि सीधे तौर पर आवेदक के खाते में ट्रांसफर या क्रेडिट नहीं हुई है।

बचाव पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि आवेदक वर्तमान में कैशियर के रूप में कार्यरत एक बैंक कर्मचारी है। हालांकि जमानत याचिका के पैराग्राफ 39 में चार मामलों के आपराधिक इतिहास का जिक्र किया गया था, लेकिन वकील ने साथ ही यह दलील भी दी कि आवेदक एक कानून का पालन करने वाला नागरिक है, जिसका कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है और उसे पुलिस द्वारा तुरंत गिरफ्तार किए जाने का डर है। आवेदक ने चल रही जांच में पूरा सहयोग करने और जब भी आवश्यकता हो, जांच अधिकारी के सामने उपस्थित रहने का वचन दिया।

याचिका का विरोध करते हुए, राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे विद्वान एजीए ने बचाव पक्ष के दावों का खंडन किया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आवेदक का नाम वास्तव में एफआईआर में दर्ज है और उसके खिलाफ अपराध करने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, इसलिए वह किसी राहत का हकदार नहीं है।

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कोर्ट का विश्लेषण और निर्णय

दोनों पक्षों की परस्पर विरोधी दलीलों का मूल्यांकन करने के बाद, कोर्ट ने आवेदक को अस्थायी संरक्षण देने का निर्णय लिया। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने निम्नलिखित टिप्पणी की:

“मामले के उपरोक्त तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने तथा रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद, यह कोर्ट इसे अंतरिम अग्रिम जमानत का उपयुक्त मामला मानता है।”

कोर्ट ने विकास पांडेय को निजी मुचलका और दो जमानतदार पेश करने पर अंतरिम अग्रिम जमानत पर तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। यह राहत कई सख्त शर्तों के पालन पर निर्भर है:

  • आवेदक को आवश्यकता पड़ने पर पुलिस पूछताछ के लिए उपलब्ध रहना होगा।
  • वह मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेगा, और न ही सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ करेगा।
  • वह कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेगा।
  • वह अभियोजन पक्ष के गवाहों पर दबाव नहीं डालेगा या उन्हें डराएगा नहीं।
  • यदि चार्जशीट दायर की जाती है, तो उसे मुकदमे के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए और व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्राप्त न होने पर ट्रायल कोर्ट के सामने तय तारीख पर पेश होना होगा।
  • यदि इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो संबंधित कोर्ट को जमानत रद्द करने की छूट होगी।
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कोर्ट ने राज्य को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, और उसके बाद आवेदक के वकील को प्रतिउत्तर हलफनामा (रि rejoinder) दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। यह अंतरिम सुरक्षा मामले की अगली सुनवाई तक लागू रहेगी।

मामले का विवरण

मामले का शीर्षक: विकास पांडेय बनाम स्टेट ऑफ यू.पी. थ्रू. प्रिन. सेक्रेटरी, डिपार्टमेंट ऑफ होम, लखनऊ
वाद संख्या: क्रिमिनल मिसलेनियस एंटीसिपेटरी बेल एप्लीकेशन यू/एस 482 बीएनएसएस नंबर – 1229 ऑफ 2026
पीठ: जस्टिस श्री प्रकाश सिंह
निर्णय की तिथि: 30 जून, 2026

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