केरल के एक उपभोक्ता आयोग ने सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतने के कारण एक अम्यूज़मेंट पार्क पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने पार्क संचालक को वॉटर राइड के दौरान घायल हुई 10 वर्षीय एक स्कूली छात्रा को ₹2.27 लाख से अधिक का मुआवजा और हर्जाना देने का आदेश दिया है। इस हादसे में बच्ची के पैर की हड्डी टूट गई थी, जिसके बाद वह स्थायी रूप से आंशिक विकलांगता का शिकार हो गई है।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फैंटेसी पार्क (Fantasy Park) को अपनी सेवाओं में गंभीर कमी का जिम्मेदार पाया। आयोग के अध्यक्ष विनय मेनन वी और सदस्यों- विद्या ए व कृष्णनकुट्टी एन के की पीठ ने 22 जून को यह फैसला सुनाया। आयोग ने स्पष्ट किया कि वॉटर प्ले स्टेशन पर आने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम न करना सीधे तौर पर सेवा में कोताही है।
यह दुर्घटना फरवरी 2024 में पल्लिकड़ स्थित एयूपी स्कूल की एक दिवसीय पिकनिक के दौरान हुई थी। पीड़ित बच्ची अपने स्कूल के 54 सहपाठियों के साथ पार्क आई थी, जहां ‘वॉटर प्ले स्टेशन’ नामक राइड से फिसलकर गिरने के कारण उसके पैर की हड्डी (फीमर) टूट गई। गंभीर रूप से घायल बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां 2 फरवरी से 6 फरवरी 2024 तक भर्ती रखकर उसका ऑपरेशन किया गया। इलाज करने वाले डॉक्टर ने प्रमाणित किया है कि इस गंभीर चोट के कारण बच्ची को 10 प्रतिशत स्थायी विकलांगता का सामना करना पड़ा है।
मुआवजे की मांग और अदालती आदेश
बच्ची के पिता उम्मर एम के ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कर ₹7.5 लाख के हर्जाने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि वे पहले ही इलाज पर ₹1 लाख से अधिक खर्च कर चुके हैं और भविष्य में बच्ची के पैर से इम्प्लांट (रॉड) निकालने के लिए होने वाली आगामी सर्जरी में भी बड़ा खर्च होना तय है।
आयोग ने अपने फैसले में फैंटेसी पार्क को निर्देश दिया कि वह पीड़ित परिवार को सामान्य मुआवजे के रूप में ₹2 लाख और कानूनी अदालती खर्च के लिए ₹25,000 का भुगतान करे। इसके अलावा, इलाज के सत्यापित खर्च के रूप में ₹2,446 की राशि पर 24 अगस्त 2024 से भुगतान होने तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
बीमा कंपनी को मिली राहत
इस शिकायत में पार्क की बीमा कंपनी ‘यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी’ को भी पक्षकार बनाया गया था, लेकिन आयोग ने उसके खिलाफ दावों को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में सीधे बीमा कंपनी के खिलाफ दायर शिकायत कानूनन स्वीकार्य नहीं है।
बीमा कंपनी की ओर से पेश वकील एस. दीप्ति ने दलील दी थी कि थीम पार्क ने उनके पास कोई दावा (क्लेम) दर्ज नहीं कराया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या हादसा सचमुच राइड के दौरान ही हुआ था और कहा कि बच्ची की स्थायी विकलांगता को साबित करने के लिए पर्याप्त मेडिकल दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं।
पार्क प्रबंधन की गैर-हाजिरी
इस पूरी सुनवाई के दौरान फैंटेसी पार्क का कोई भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। आयोग द्वारा भेजे गए आधिकारिक नोटिसों के बावजूद पार्क प्रबंधन की तरफ से कोई पेश नहीं हुआ, जिसके बाद उपभोक्ता अदालत ने पार्क के खिलाफ एकतरफा (ex-parte) कार्रवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
यह फैसला रेखांकित करता है कि सैलानियों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरतने पर मनोरंजन पार्कों को कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा। उपभोक्ता अपनी किसी भी शिकायत के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 या केरल राज्य उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1800-425-1550 पर संपर्क कर सकते हैं।

