इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को उस याचिका पर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें ताजमहल परिसर के भीतर एक हिंदू मंदिर होने का दावा किया गया है।
जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र और एएसआई को अपना पक्ष रखने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस याचिका में सरकारी पक्षों के अलावा चौथे प्रतिवादी बनाए गए पंकज कुमार वर्मा को भी औपचारिक नोटिस जारी किया है।
यह याचिका आगामी 3 जुलाई को ‘अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर’, अधिवक्ता हरिशंकर जैन और चार अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर की गई थी। इस याचिका के जरिए आगरा की निचली अदालतों के उन फैसलों को चुनौती दी गई है, जिन्होंने ताजमहल के विवादित हिस्से का सर्वेक्षण कराने और वहां की फोटोग्राफी कराने की मांग को खारिज कर दिया था।
निचली अदालतों के फैसलों को चुनौती
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने दलील दी कि इस पूरे विवाद के सही निस्तारण के लिए मौके पर एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करना और वहां का फोटोग्राफिक रिकॉर्ड तैयार करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आगरा की स्थानीय सिविल कोर्ट ने सर्वे कमिश्नर नियुक्त करने के उनके आवेदन को गलत तरीके से खारिज कर दिया था और इसके बाद जिला अदालत ने भी उनकी निगरानी याचिका (रिवीजन पिटीशन) को विचारणीय न मानते हुए निरस्त कर दिया, जो कि अनुचित था।
यह याचिका सीधे तौर पर आगरा जिला अदालत के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) और अपर जिला जज (एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज) के उन आदेशों को चुनौती देती है, जिसमें उन्होंने विवादित स्थल के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए एडवोकेट कमिश्नर भेजने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
वर्ष 2015 से लंबित है मुख्य मुकदमा
यह पूरा मामला साल 2015 में आगरा की दीवानी अदालत में दायर किए गए एक मूल मुकदमे (डिक्लेरेटरी सूट) से उपजा है। आगरा के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में लंबित इस मुख्य मुकदमे में आधिकारिक तौर पर यह घोषित करने की मांग की गई है कि ताजमहल परिसर के भीतर ‘अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर’ मौजूद है।
यह मुख्य मुकदमा अभी भी अंतिम फैसले के इंतजार में लंबित है। इसी बीच, याचिकाकर्ताओं ने ताजमहल के भीतर के हिस्सों के निरीक्षण और दस्तावेजीकरण के लिए अंतरिम राहत के तौर पर अर्जियां दाखिल की थीं। निचली अदालतों द्वारा इन अंतरिम अर्जियों को खारिज किए जाने के बाद अब इस मामले को हाईकोर्ट के समक्ष लाया गया है।

