दिल्ली हाईकोर्ट ने आगामी एशियाई खेलों के लिए भारत की ड्रेसेज (घुड़सवारी) टीम के चयन में दखल देने से इनकार कर दिया है। सोमवार को हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने देश के शीर्ष घुड़सवारों—अनूष अग्रवाल और सुदीप्ति हजेला—द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया। ये दोनों खिलाड़ी साल 2022 के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता हैं, जिन्होंने टीम में चयन न होने के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस 29 जून के फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें खिलाड़ियों को कोई भी राहत देने से मना कर दिया गया था। दोनों खिलाड़ियों ने इक्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया (EFI) के चयन निर्णयों के खिलाफ अपील की थी।
हालांकि, खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान यह जरूर माना कि ईएफआई अपने ही चयन मानदंडों के कुछ नियमों का पूरी तरह पालन करने में विफल रहा। इसके बावजूद, अदालत ने खेल के व्यापक हित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की संभावनाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए इस मामले में हस्तक्षेप न करने का फैसला किया।
नया ट्रायल कराना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन
अदालत ने स्पष्ट किया कि 15 जुलाई 2026 की तय समयसीमा बेहद करीब है, जिसे देखते हुए इस चरण में नए सिरे से चयन ट्रायल आयोजित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
खंडपीठ के अनुसार, इस प्रतियोगिता के सभी छह संभावित दावेदार खिलाड़ी और उनके घोड़े वर्तमान में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हैं। इतने कम समय में सभी घोड़ों और एथलीटों को किसी एक साझा स्थान पर लाना और उनके बीच नई प्रतियोगिता आयोजित करना तार्किक रूप से असंभव है।
अदालत ने कहा कि खेल के व्यापक हित को सुरक्षित रखने और एशियाई खेलों में भारतीय टीम के प्रदर्शन को प्रभावित होने से बचाने के लिए वह इस मामले में खुद को सीमित रखने के लिए बाध्य है। हालांकि, हाईकोर्ट ने ईएफआई को कड़े निर्देश दिए हैं कि वह भविष्य में अपने चयन मानदंडों का पूरी तरह और सख्ती से पालन सुनिश्चित करे।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
यह विवाद ईएफआई की तदर्थ (एड-हॉक) समिति द्वारा 16 जून को जारी की गई ड्रेसेज चयन सूची के बाद शुरू हुआ। इस सूची में चार मुख्य घुड़सवारों का चयन किया गया था, जबकि 2022 एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता अनूष अग्रवाल को पहले रिजर्व खिलाड़ी और सुदीप्ति हजेला को दूसरे रिजर्व खिलाड़ी के रूप में रखा गया था।
अग्रवाल और हजेला ने अपने इस रिजर्व स्टेटस को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। उन्होंने मिनिमम एलिजिबिलिटी रिक्वायरमेंट्स (MERs) की गणना के तरीके, चयन मानदंडों की व्याख्या, अतिरिक्त चयन ट्रायल न कराने और चयन समिति पर पक्षपात के आरोप लगाए थे।
एकल न्यायाधीश का फैसला सही ठहराया
खंडपीठ का यह निर्णय हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश के 29 जून के उस फैसले का समर्थन करता है, जिसमें खिलाड़ियों की प्रारंभिक याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था।
एकल न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष थी और इसमें किसी भी तरह के पक्षपात, प्रक्रियात्मक त्रुटि या मनमानेपन के प्रमाण नहीं मिले हैं जो न्यायिक हस्तक्षेप का आधार बन सकें।
जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले एशियाई खेलों की ड्रेसेज स्पर्धा के लिए भारतीय टीम की घोषणा के साथ शुरू हुआ यह कानूनी विवाद अब इस फैसले के बाद समाप्त हो गया है।

