विवादित टिप्पणी मामला: सुप्रीम कोर्ट का याचिका पर सुनवाई से इनकार, कहा- सीधे शीर्ष अदालत आने के बजाय स्थानीय स्तर पर कानूनी प्रक्रिया अपनाएं

सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की नेता नाजिया इलाही खान की कथित विवादित टिप्पणी के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से सोमवार को इनकार कर दिया। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता को सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के बजाय संबंधित स्थानीय अधिकारियों और निचली अदालत का रुख करने का निर्देश दिया।

मामले को बेवजह संवेदनशील न बनाने की चेतावनी

सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील को इस तरह के संवेदनशील मामलों को तूल न देने की सख्त हिदायत दी। जस्टिस अमानुल्लाह ने टिप्पणी की कि ऐसे मुद्दों को बेवजह उछालने से समाज में दूसरों को भी ऐसा ही व्यवहार दोहराने का गलत बढ़ावा मिलता है। उन्होंने वकील को याद दिलाया कि वे कानून के अधिकारी होने के साथ-साथ सबसे पहले देश के नागरिक हैं, इसलिए उन्हें ऐसे संवेदनशील मामलों के समाज पर पड़ने वाले दूरगामी और गंभीर असर को समझना चाहिए।

प्रक्रिया को शॉर्ट-सर्किट करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता

कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा सीधे शीर्ष अदालत का रुख करने पर सवाल उठाए। जस्टिस अमानुल्लाह ने पूछा कि इस मामले में स्थानीय कानूनी विकल्पों और संबंधित अदालतों का इस्तेमाल पहले क्यों नहीं किया गया। उन्होंने देश की न्यायिक प्रणाली पर भरोसा रखने की बात कहते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पूरे तंत्र की निगरानी के लिए एक शीर्ष संस्था है, इसे सीधे शिकायत दर्ज कराने का पहला मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।

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पीठ ने चिंता व्यक्त की कि आजकल स्थापित कानूनी प्रक्रिया को ‘शॉर्ट-सर्किट’ यानी बायपास करके सीधे शीर्ष अदालत में राहत मांगने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्थापित रास्तों से बचने की इस प्रवृत्ति के कारण पूरी न्यायिक व्यवस्था प्रभावित होती है। इससे निचले स्तर के प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारियों को भी यह लगने लगता है कि हर कार्रवाई ऊपर से ही निर्देशित होनी चाहिए।

कानून के तहत सख्त कार्रवाई का भरोसा

अदालत ने स्वीकार किया कि यह मामला काफी गंभीर है और स्थानीय स्तर पर इससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने या भावनाएं भड़कने की आशंका हो सकती है। इसके बावजूद, पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि इसके लिए संविधान और कानून द्वारा तय की गई उचित प्रक्रियाओं का ही पालन किया जाना चाहिए।

जस्टिस अमानुल्लाह ने याचिकाकर्ता को आश्वस्त किया कि अगर स्थानीय स्तर पर कानूनी प्रक्रियाएं निष्प्रभावी साबित होती हैं, तो सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करने के लिए हमेशा तैयार है। उन्होंने कहा कि कानून तोड़ने वाले व्यक्ति के खिलाफ स्थानीय अधिकारियों द्वारा पूरी ताकत से कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि तय प्रक्रिया के तहत न्याय दिलाने में सिस्टम विफल रहता है, तो सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे चौबीसों घंटे खुले हैं।

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क्या है पूरा मामला

यह कानूनी विवाद भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की नेता नाजिया इलाही खान द्वारा की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में पिछले महीने मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) की पुलिस ने नाजिया के खिलाफ दो प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की थीं। याचिकाकर्ता के प्रतिनिधि ने कोर्ट में चिंता जताई थी कि इस टिप्पणी से स्थानीय स्तर पर सांप्रदायिक सद्भाव को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

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