इंश्योरेंस प्रीमियम का ऑटो-डेबिट फेल होने पर ग्राहक को सूचना देना बैंक की जिम्मेदारी, उपभोक्ता आयोग ने ₹1.5 लाख मुआवजा देने का दिया आदेश

अमृतसर जिला उपभोक्ता आयोग ने एक बैंक को सेवा में कमी का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि अगर इंश्योरेंस प्रीमियम का ऑटो-डेबिट पर्याप्त बैलेंस नहीं होने के कारण फेल हो जाता है, तो बैंक को खाताधारक को इसकी जानकारी देनी चाहिए।

आयोग के अध्यक्ष जगदीश्वर कुमार चोपड़ा और सदस्य मनदीप कौर ने बैंक को शिकायतकर्ता को ₹1.5 लाख मुआवजा और ₹10,000 मुकदमा खर्च देने का निर्देश दिया। शिकायतकर्ता की बेटी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी और उसके प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत बीमा कवर का प्रीमियम जमा नहीं होने के कारण पॉलिसी लैप्स हो गई थी।

आयोग ने पाया कि बैंक ने सालाना प्रीमियम काटने की कोशिश तो की थी, लेकिन ट्रांजैक्शन फेल होने और डेबिट एंट्री रिवर्स होने की जानकारी खाताधारक को नहीं दी।

प्रीमियम नहीं कटने से बीमा पॉलिसी हुई लैप्स

शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता की बेटी का संबंधित बैंक में खाता था और वह केंद्र सरकार समर्थित प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में शामिल थी। योजना का सालाना प्रीमियम उसके खाते से अपने आप कटता था।

READ ALSO  ASI को मिली कोर्ट से काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानव्यापी मस्जिद विवादित स्थल का सर्वेक्षण करने की अनुमति

बेटी की मौत के बाद शिकायतकर्ता ने बीमा राशि के लिए बैंक से संपर्क किया। तब उसे बताया गया कि वर्ष 2021-22 का प्रीमियम जमा नहीं हुआ था, जिसके कारण बीमा पॉलिसी लैप्स हो गई थी।

बैंक स्टेटमेंट से सामने आया कि ₹330 का सालाना प्रीमियम काटने की कोशिश की गई थी। उस समय खाते में केवल ₹223.42 थे और ₹106.58 की कमी थी। इस वजह से डेबिट एंट्री बाद में रिवर्स कर दी गई।

शिकायतकर्ता का कहना था कि उसकी बेटी ने बाद में खाते में ₹1,000 जमा कर दिए थे, लेकिन बैंक ने न तो पॉलिसी का नवीनीकरण किया और न ही उसे यह बताया कि प्रीमियम काटने का पहले का प्रयास असफल हो गया था।

बैंक ने पर्याप्त बैलेंस न होने का दिया तर्क

बैंक ने स्वीकार किया कि खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने के कारण प्रीमियम नहीं काटा जा सका। हालांकि, बैंक ने दलील दी कि खाते में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखना खाताधारक की जिम्मेदारी थी और बीमा कंपनी को प्रीमियम की रकम प्राप्त नहीं हुई थी।

आयोग ने इस तर्क को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।

READ ALSO  दिल्ली के प्रदूषण संकट से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया

आयोग ने कहा कि खाताधारक ऑटो-डेबिट व्यवस्था के तहत बीमा योजना से जुड़ी थी और प्रीमियम समय पर काटकर भेजने के लिए बैंकिंग व्यवस्था पर निर्भर थी।

आयोग ने कहा कि जब बैंक ऑटो-डेबिट सुविधा संचालित करने की जिम्मेदारी लेता है, तो वह केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह नहीं बच सकता कि कंप्यूटर आधारित सिस्टम रकम नहीं काट सका।

आयोग ने यह भी कहा कि बैंक को यह जानकारी थी कि प्रीमियम काटने के समय खाते में पर्याप्त रकम नहीं थी और डेबिट एंट्री बाद में रिवर्स हो गई थी। ऐसी स्थिति में बैंक का कर्तव्य था कि वह खाताधारक को बीमा नवीनीकरण के लिए किया गया ट्रांजैक्शन फेल होने की सूचना देता।

आयोग ने बैंक की इस चूक को सेवा में कमी माना और उसे शिकायतकर्ता को ₹1.5 लाख मुआवजा तथा ₹10,000 मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों को चेतावनी दी कि यदि वे मासिक धर्म स्वच्छता पर राष्ट्रीय नीति पर प्रतिक्रिया प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं, तो "कानून का जबरदस्त इस्तेमाल" करना होगा
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles