साल 2018 कस्टडी डेथ मामला: पीड़ित मां को मिला 5 लाख का मुआवजा, बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका बंद की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने साल 2018 में डोंगरी बाल सुधार गृह में एक 17 वर्षीय किशोर की हिरासत में हुई मौत से जुड़ी याचिका का निपटारा कर दिया है। अदालत को सूचित किया गया कि महाराष्ट्र सरकार ने पीड़ित मुआवजा योजना के तहत मृतक की मां को 5 लाख रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया है।

जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस आशीष चव्हाण की पीठ ने 1 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान इस याचिका को बंद करने के निर्देश दिए। पीठ ने नोट किया कि मृतक की मां को आर्थिक मुआवजा मिल चुका है और याचिकाकर्ता की अन्य प्राथमिक शिकायतों का भी समाधान हो गया है।

हिरासत में मारपीट और मौत का मामला

यह मामला 3 अप्रैल 2018 से शुरू हुआ था, जब कुर्ला रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कर्मियों ने मोबाइल चोरी के संदेह में एक नाबालिग लड़के को हिरासत में लिया था। आरपीएफ ने जांच के लिए उसे वडाला गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) को सौंप दिया, जिसके बाद उसे डोंगरी स्थित बाल सुधार गृह (ऑब्जर्वेशन होम) भेज दिया गया।

बाद में जब इस किशोर को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश किया गया, तो उसकी मां ने आरोप लगाया कि हिरासत में उनके बेटे के साथ मारपीट की गई थी। वडाला जीआरपी को सौंपे जाने से पहले हुई मेडिकल जांच में भी लड़के को हेयरलाइन फ्रैक्चर होने की बात सामने आई थी। सुधार गृह में रहने के दौरान ही बुखार, उल्टी और सांस लेने में तकलीफ होने के बाद 14 अप्रैल 2018 को इस नाबालिग लड़के की मौत हो गई थी।

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चार आरपीएफ अधिकारियों पर एफआईआर और जांच जारी

इस गंभीर मामले में आखिरकार फरवरी 2026 में डोंगरी पुलिस ने आरपीएफ के चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इन अधिकारियों पर मारपीट करने और आपराधिक धमकी देने सहित अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने हाईकोर्ट को आश्वस्त किया कि इस मामले की जांच अभी जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आगे की जांच में कोई और अपराध उजागर होता है, तो एफआईआर में नई धाराएं जोड़ी जाएंगी। इसके साथ ही, जांच में किसी भी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आने पर उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मृतक की मां की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट गौरव भावनानी ने अदालत को बताया कि याचिका में शामिल अन्य मांगों को वे अलग से उठाना जारी रखेंगे। इन मांगों में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (जेजे एक्ट) के तहत आवश्यक अधिकारियों की नियुक्ति की मांग भी शामिल है।

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