गर्भवती पत्नी की हत्या के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: उम्रकैद की सजा घटाकर सात साल की, पत्नी के तंज को माना ‘गंभीर उकसावा’

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपनी सात महीने की गर्भवती पत्नी की हत्या के आरोपी एक व्यक्ति की उम्रकैद की सजा को घटाकर सात साल के कठोर कारावास में बदल दिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिन्द्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह घटना किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा नहीं थी, बल्कि पत्नी द्वारा कहे गए शब्दों से मिले अचानक और गंभीर उकसावे का नतीजा थी।

यह मामला छिंदवाड़ा जिले के चौरई ब्लॉक के निवासी शिवा कहार से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने शिवा की दोषसिद्धि में बदलाव करते हुए उसे हत्या की जगह गैर-इरादतन हत्या (भारतीय दंड संहिता की धारा 304 पार्ट-2) का दोषी माना है। अदालत ने सात साल की कैद के साथ ही आरोपी पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न देने पर उसे एक साल की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

विवाद और जानलेवा हमला

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 18 सितंबर 2021 को हुई थी, जब शिवा कहार और उसकी पत्नी किरण के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। किरण उस समय सात महीने की गर्भवती थी। तीखी बहस के दौरान किरण ने शिवा से कहा कि वह उसके जैसे एक हजार पति रख सकती है।

इस बात से गुस्साए शिवा ने पास में ही पड़ा एक पत्थर उठाकर किरण के सिर पर दे मारा। इस गंभीर चोट की वजह से किरण की मौत हो गई।

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घटना के तुरंत बाद खुद पुलिस को दी सूचना

हमले के फौरन बाद शिवा ने खुद अपने ससुर को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। इसके साथ ही उसने स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी फोन कर अपनी पत्नी की मौत की बात बताई, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

शुरुआत में छिंदवाड़ा जिला अदालत ने शिवा को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जिला अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए शिवा ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

हाईकोर्ट का तर्क और सजा में बदलाव

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पूरे मामले की समीक्षा करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी का इरादा पहले से हत्या करने का नहीं था। खंडपीठ ने इस बात को रेखांकित किया कि शिवा ने हमले के लिए किसी हथियार की तैयारी नहीं की थी, बल्कि अचानक गुस्से में आकर उसने पास पड़े पत्थर का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, अदालत ने घटना के तुरंत बाद आरोपी द्वारा खुद पुलिस और ससुराल वालों को सूचना देने वाले व्यवहार को भी ध्यान में रखा।

मृतका के बयान पर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई पत्नी अपने पति से कहती है कि वह उसके जैसे हजार पति रख सकती है, तो यह पति की योग्यता और उसके आत्मसम्मान पर सीधा प्रहार है। यह दर्शाता है कि एक इंसान और पति के रूप में उसकी कोई कीमत नहीं है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि ऐसे शब्द किसी भी व्यक्ति के लिए अचानक और गंभीर उकसावे का काम कर सकते हैं।

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धारा 304 पार्ट-2 के तहत दोषसिद्धि

इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने माना कि यह मामला आईपीसी की धारा 304 पार्ट-2 के अंतर्गत आता है। कानून के मुताबिक, धारा 304 पार्ट-1 तब लागू होती है जब आरोपी का इरादा जान लेने या ऐसी गंभीर शारीरिक चोट पहुंचाने का हो जिससे मौत होना तय हो। वहीं, धारा 304 पार्ट-2 वहां लागू होती है जहां आरोपी को यह जानकारी तो होती है कि उसके कृत्य से मौत हो सकती है, लेकिन उसका इरादा पहले से हत्या करने या जानलेवा चोट पहुंचाने का नहीं होता।

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