सड़क हादसे में जान गंवाने वाले NSIT छात्रों के परिजनों को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, मुआवजा बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये से अधिक किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2017 के एक दर्दनाक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NSIT) के दो इंजीनियरिंग छात्रों के परिवारों को मिलने वाले मुआवजे में भारी बढ़ोतरी की है। हाईकोर्ट ने एक छात्र के परिवार के लिए कुल मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये से अधिक कर दिया है, जबकि दूसरी छात्रा के परिवार को मिलने वाली रकम में भी बड़ा इजाफा किया गया है।

जस्टिस अनीश दयाल ने 1 जुलाई को दिए अपने फैसले में पीड़ित परिवारों की याचिका पर यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने मुआवजे की रकम घटाने के लिए बीमा कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड (ICICI Lombard) की ओर से दायर की गई अपीलों को खारिज कर दिया। वहीं, पीड़ित परिवारों की ओर से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट सुमीत वर्मा ने कोर्ट में मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

कोर्ट के नए फैसले के तहत, चौथे वर्ष के छात्र विनय खुराना के परिवार को अब कुल 1,07,71,800 रुपये का मुआवजा मिलेगा। यह राशि मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा सितंबर 2020 में तय किए गए 83.86 लाख रुपये से 23,85,800 रुपये अधिक है। इसी तरह, तीसरे वर्ष की छात्रा प्रभलीन कौर के परिजनों को मिलने वाली राशि को 38.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 84,32,600 रुपये कर दिया गया है, जो कि सीधे तौर पर 45,82,600 रुपये की बढ़ोतरी है।

हादसे और लापरवाही पर कोर्ट का रुख

यह दर्दनाक हादसा फरवरी 2017 में हुआ था, जब दोनों छात्र अपने एक दोस्त के साथ कार से दिल्ली जा रहे थे। तेज और लापरवाही से चलाई जा रही कार डिवाइडर की रेलिंग से टकरा गई थी, जिससे दोनों छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई। ड्राइवर ने अदालत को लिखित में दलील दी थी कि सूरज की तेज धूप आंखों पर पड़ने के कारण वह कार पर से नियंत्रण खो बैठा था। हालांकि, जस्टिस दयाल ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे अविश्वसनीय करार दिया। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर किया कि न तो कार के ड्राइवर और न ही कार के मालिक ने अदालत में गवाही दी ताकि वे पुलिस की एफआईआर और चार्जशीट में दर्ज लापरवाही के आरोपों का खंडन कर सकें।

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करियर की संभावनाएं और योग्यता बनी आधार

अदालत ने मुआवजा राशि बढ़ाते हुए दोनों छात्रों की बेहतरीन शैक्षणिक योग्यता और उनके उज्ज्वल भविष्य का विशेष ध्यान रखा। कोर्ट ने कहा कि दोनों छात्रों ने कठिन जेईई (JEE) परीक्षा पास कर देश के प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला लिया था। हादसे के वक्त विनय खुराना के पास एक सरकारी उपक्रम से नौकरी का प्रस्ताव था, वहीं प्रभलीन कौर एक नामी फार्मास्युटिकल कंपनी में पेड इंटर्नशिप कर रही थीं। कोर्ट ने माना कि साल 2017 इन छात्रों के भविष्य की संभावित कमाई के आकलन के लिए एक निर्णायक मोड़ था।

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देरी पर ब्याज का निर्देश

हादसे के बाद बीते नौ सालों और ट्रिब्यूनल के पहले फैसले के बाद बीते छह सालों के लंबे समय को देखते हुए हाईकोर्ट ने ब्याज दरों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ट्रिब्यूनल द्वारा तय किए गए मूल मुआवजे पर 9 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज मिलता रहेगा। वहीं, हाईकोर्ट द्वारा बढ़ाई गई अतिरिक्त मुआवजे की राशि पर 6.75 प्रतिशत की वार्षिक दर से ब्याज लागू होगा।

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