सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में पंचायत चुनाव कराने की समयसीमा बढ़ाने के हाईकोर्ट के आदेश को दी चुनौती खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मणिपुर हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें राज्य में पंचायत चुनाव कराने की समयसीमा 16 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई थी। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।

जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की आंशिक कार्यदिवस पीठ ने फेइरोइजाम हेरामनी और अन्य द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया। यह अपील मणिपुर हाईकोर्ट के 19 मई 2026 के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी।

सुनवाई के दौरान मणिपुर सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है। यदि स्थानीय निकायों के चुनाव निर्धारित समयसीमा के भीतर नहीं कराए जाते, तो सरकार अवमानना की स्थिति में आ सकती है।

इन दलीलों पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपील में कोई दम नहीं है और हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर तक बढ़ाई थी समयसीमा

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19 मई 2026 के अपने निर्णय में मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य में छठे आम पंचायत चुनाव कराने की अंतिम तिथि 16 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी थी।

मुख्य न्यायाधीश एम. सुंदर और जस्टिस ए. गुणेश्वर शर्मा की पीठ ने हालिया विधायी संशोधनों के अनुरूप राज्य में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू करने का रास्ता भी साफ किया था।

सरकार की पुनर्विचार याचिकाओं पर बदला गया था पूर्व आदेश

यह मामला मणिपुर सरकार द्वारा दायर पुनर्विचार याचिकाओं के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष आया था। सरकार ने अगस्त 2025 के उस आदेश में संशोधन की मांग की थी, जिसमें छह महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था।

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राज्य सरकार ने दलील दी थी कि प्रदेश की मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति और फरवरी 2025 से लागू राष्ट्रपति शासन के कारण तत्काल चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं था।

इन असाधारण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में संशोधन किया और राज्य सरकार तथा राज्य निर्वाचन आयोग को चुनावी प्रक्रिया पूरी करने के लिए 16 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया।

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