केरल की एक अदालत की कस्टडी से यौन उत्पीड़न के संवेदनशील वीडियो वाले मेमोरी कार्ड से कथित तौर पर अवैध रूप से छेड़छाड़ करने और उसे देखने के मामले में पीड़िता ने केरल हाईकोर्ट का रुख किया है। पीड़िता ने इस पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर के जरिए दायर अपनी याचिका में अभिनेत्री ने दावा किया है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर ट्रायल कोर्ट द्वारा पहले की गई जांच पूरी तरह से ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों’ का उल्लंघन थी। याचिका में हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि यह जांच उसी ट्रायल कोर्ट जज की निगरानी में कराई गई, जिनकी कस्टडी में रहते हुए मेमोरी कार्ड के साथ पहली बार अनधिकृत छेड़छाड़ की गई थी।
याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि साल 2024 में इस मामले को लेकर आई दो जांच रिपोर्टें विश्वसनीय नहीं हैं। अभिनेत्री के अनुसार, इस जांच को पूरी तरह गुप्त रखा गया और हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इसमें न तो स्वतंत्र विशेषज्ञों की मदद ली गई, न ही पुलिस या पीड़िता को इसमें शामिल किया गया। इसके अलावा, याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि जांच अधिकारी (ट्रायल कोर्ट जज) ने इस बात की पड़ताल ही नहीं की कि क्या मेमोरी कार्ड को अवैध तरीके से एक्सेस करने और उसे कोर्ट की सुरक्षित कस्टडी से हटाने के पीछे आरोपियों का कोई वित्तीय लाभ या निजी स्वार्थ छिपा था।
निजता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन
याचिका के मुताबिक, कोर्ट की सुरक्षित कस्टडी में रहने के दौरान जनवरी 2018 से जुलाई 2021 के बीच तीन अलग-अलग मौकों पर उस मेमोरी कार्ड को अवैध रूप से एक्सेस किया गया था, जिसमें यौन उत्पीड़न का वीडियो रिकॉर्ड था।
अभिनेत्री का तर्क है कि इस संवेदनशील वीडियो के साथ हुई अनधिकृत छेड़छाड़ संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उन्हें मिले गरिमा और निजता के मौलिक अधिकार का सीधा हनन है। उन्होंने कहा कि न्याय के लंबे इंतजार के बीच इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से फिर से प्रताड़ित किया है और देश की न्याय प्रणाली पर उनके भरोसे को भी गहरी ठेस पहुंचाई है।
क्या था 2017 का पूरा मामला
यह पूरा मामला 17 फरवरी 2017 का है, जब केरल में कुछ लोगों ने एक बहुभाषी अभिनेत्री की चलती गाड़ी में जबरन घुसकर उन्हें बंधक बना लिया था। करीब दो घंटे तक बंधक बनाए रखने के दौरान मुख्य आरोपी सुनील एन एस उर्फ पल्सर सुनी ने अपने साथियों की मदद से अभिनेत्री का यौन उत्पीड़न किया और इस पूरी वारदात का वीडियो भी रिकॉर्ड किया। इस घटना ने पूरे केरल समाज को हिलाकर रख दिया था।
अदालत का फैसला और सजा
लंबी सुनवाई के बाद निचली अदालत ने इस मामले के मुख्य छह आरोपियों—सुनील एन एस, मार्टिन एंटनी, मणिकंदन बी, विजेष वी पी, सलीम एच और प्रदीप को दोषी ठहराते हुए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।
हालांकि, लगभग छह साल तक चले मुकदमे के बाद अदालत ने अभिनेता दिलीप और तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। दिलीप पर इस अपराध की साजिश रचने का आरोप था और शुरुआती पुलिस जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था, लेकिन अंततः अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।

