उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालतों में राज्य का पक्ष रखने वाले सरकारी अधिवक्ताओं (सरकारी वकीलों) को बड़ी सौगात दी है। कैबिनेट ने सरकारी वकीलों की मासिक रिटेनरशिप और प्रति सुनवाई (अपीयरेंस) फीस में 50 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी के न्याय विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
राज्य कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। इस निर्णय से जिला अदालतों से लेकर हाईकोर्ट और देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में सरकार की पैरवी करने वाले हजारों वकीलों को सीधा फायदा पहुंचेगा। इस वेतन संशोधन से राज्य के खजाने पर सालाना लगभग 190 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।
लंबे समय से लंबित थी मांग
प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकारी मुकदमों की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं की फीस में लंबे समय बाद सम्मानजनक सुधार किया गया है।
इस निर्णय का स्वागत करते हुए उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) अजय मिश्रा ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल फीस बढ़ाना नहीं है, बल्कि हमारी न्यायिक प्रणाली को अधिक सुदृढ़, उत्तरदायी और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
उन्होंने ध्यान दिलाया कि यह समीक्षा बेहद जरूरी थी, क्योंकि जिला अदालतों के वकीलों की फीस में करीब 10 साल से और महाधिवक्ता के स्तर पर लगभग 14 साल से कोई बदलाव नहीं हुआ था। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी से सरकारी वकीलों का मनोबल बढ़ेगा और वे अदालतों में अधिक तत्परता और मजबूती के साथ राज्य का पक्ष रख सकेंगे।
संशोधित फीस और रिटेनरशिप का पूरा ब्योरा:
इस नए फैसले के तहत विभिन्न स्तरों पर मानदेय (फीस) में किए गए बदलाव इस प्रकार हैं:
1. जिला न्यायालय (District Court) स्तर पर
- जिला सरकारी वकील (DGC): मासिक रिटेनरशिप को 9,000 रुपये से बढ़ाकर अब 14,000 रुपये कर दिया गया है। वहीं, प्रति सुनवाई की फीस भी 1,650 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये की गई है।
- अपर जिला सरकारी वकील (ADGC): मासिक रिटेनरशिप 7,200 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये और प्रति सुनवाई फीस 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,300 रुपये की गई है।
- नोट: इस बढ़ोतरी का लाभ जिला अदालतों में कार्यरत सहायक व उप-जिला सरकारी वकीलों, विशेष वकीलों और एमिकस क्यूरी को भी समान रूप से मिलेगा।
2. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट स्तर पर
- महाधिवक्ता (AG): मासिक रिटेनरशिप 75,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 1.25 लाख रुपये कर दी गई है। बहस की फीस भी 40,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये प्रति सुनवाई की गई है।
- अपर महाधिवक्ता (AAG): मासिक रिटेनरशिप 30,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये की गई है, जबकि बहस की फीस को दोगुना करते हुए 20,000 रुपये से बढ़ाकर 40,000 रुपये प्रति सुनवाई कर दिया गया है।
- मुख्य स्थायी अधिवक्ता / शासकीय अधिवक्ता: मासिक रिटेनरशिप 22,000 रुपये से बढ़ाकर 35,000 रुपये की गई है। प्रतिदिन बहस करने की फीस भी 7,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये कर दी गई है।
- अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता: मासिक रिटेनरशिप 12,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये और प्रतिदिन की बहस फीस 5,000 रुपये से बढ़ाकर 8,000 रुपये की गई है।
- स्थायी अधिवक्ता: मासिक रिटेनरशिप 9,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये और प्रति सुनवाई फीस 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये की गई है।
3. सुप्रीम कोर्ट प्रतिनिधित्व और पैनल अधिवक्ता
- एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AoR): मासिक रिटेनरशिप 18,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये की गई है। वहीं, बहस के लिए प्रतिदिन की फीस 10,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है।
- विशेष पैनल अधिवक्ता: प्रतिदिन सुनवाई के लिए मिलने वाली फीस को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया है।
- वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता: प्रतिदिन सुनवाई की फीस 8,000 रुपये से बढ़ाकर अब 12,000 रुपये की गई है।
- कनिष्ठ पैनल अधिवक्ता: प्रतिदिन बहस की फीस 5,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये की गई है। (ध्यान रहे कि पैनल अधिवक्ताओं को मासिक रिटेनरशिप नहीं दी जाती है)।

