वीणा टी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में CMRL की अपील स्वीकार; ED ने कोर्ट को दिया भरोसा, 5 जून तक नहीं होगी कोई कठोर कार्रवाई: केरल हाई कोर्ट

केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (CMRL) की उस महत्वपूर्ण अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है, जिसमें एकल न्यायाधीश के उस फैसले को चुनौती दी गई है जो प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच जारी रखने की अनुमति देता है। यह पूरा मामला पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी वीणा टी के साथ कंपनी के वित्तीय लेन-देन की जांच से जुड़ा हुआ है।

न्यायमूर्ति राजा विजयाराघवन और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की खंडपीठ ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला 5 जून के लिए सुरक्षित रख लिया है। इस बीच, अदालत में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत, ईडी (ED) ने भरोसा दिलाया है कि वह 5 जून को आने वाले फैसले तक कंपनी के खिलाफ कोई भी “कठोर या दंडात्मक कार्रवाई” नहीं करेगी।

कानूनी विवाद की मुख्य वजह

CMRL की यह अपील सीधे तौर पर एकल न्यायाधीश के 26 मई के उस फैसले को चुनौती देती है, जिसमें कहा गया था कि गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) द्वारा औपचारिक प्राथमिकी (FIR) या अंतिम रिपोर्ट दर्ज न किए जाने की स्थिति में भी ED धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी जांच आगे बढ़ा सकती है।

खंडपीठ के समक्ष दायर अपनी याचिका में, CMRL ने दलील दी कि एकल न्यायाधीश के इस फैसले से उसके हितों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। कंपनी ने अदालत की प्रक्रियात्मक खामियों को उजागर करते हुए बताया कि इस मामले को पहले भी दो बार (एक बार 2024 में और फिर 2025 में) आदेश सुरक्षित रखने के बाद दोबारा खोला गया।

इसके अलावा, कंपनी ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। CMRL का कहना है कि जब मामला आदेश के लिए सुरक्षित रख लिया गया था, उसके बाद ED को अतिरिक्त हलफनामे दाखिल करने की अनुमति दी गई, जिससे कंपनी को उन आरोपों का जवाब देने का उचित अवसर नहीं मिल सका।

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ये अतिरिक्त हलफनामे अप्रैल 2025 में दर्ज की गई SFIO की एक शिकायत की ओर इशारा करते हैं, जिसमें कंपनी अधिनियम के तहत धोखाधड़ी के आरोप हैं। PMLA के तहत इन्हें ‘अनुसूचित अपराध’ (Scheduled Offence) माना जाता है। CMRL का मुख्य तर्क यह है कि ED अपनी उस जांच को वैध ठहराने के लिए बाद में आई SFIO की शिकायत का सहारा नहीं ले सकती, जो उस समय शुरू की गई थी जब कोई अनुसूचित अपराध अस्तित्व में ही नहीं था। इसी आधार पर कंपनी ने 26 मई के आदेश पर रोक लगाने और उसे पूरी तरह खारिज करने की मांग की है।

जमीनी असर और पूर्व मुख्यमंत्री के ठिकानों पर छापेमारी

इस कानूनी खींचतान का असर अदालत के बाहर भी तुरंत देखने को मिला। एकल न्यायाधीश का फैसला आते ही ED ने अपनी जांच तेज कर दी। जांच एजेंसी ने 27 मई को पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों के आवासों पर सघन तलाशी अभियान चलाया।

इस अपील से पहले भी, CMRL ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर ED द्वारा दर्ज की गई प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) और अपने अधिकारियों को जारी किए गए समन को रद्द करने की मांग की थी। कंपनी का लगातार यह तर्क रहा है कि जब जांच शुरू हुई थी, तब ईडी के पास इस मामले की जांच करने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं था।

पृष्ठभूमि: 2019 के टैक्स ऑडिट से SFIO जांच तक का सफर

CMRL के वित्तीय लेन-देन से जुड़ा यह विवाद सात साल से भी अधिक पुराना है। यह मामला सबसे पहले जनवरी 2019 में सामने आया था, जब आयकर विभाग ने CMRL के कॉर्पोरेट कार्यालयों और उसके वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों पर छापेमारी की थी।

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बाद में, भाजपा नेता शोन जॉर्ज द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद इस मामले का दायरा बढ़ गया। इस शिकायत के आधार पर गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) ने अपनी जांच शुरू की, जिसने आगे चलकर ED को वीणा टी के साथ हुए वित्तीय लेन-देन के इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू करने का आधार दिया।

अब जब 5 जून को हाई कोर्ट की खंडपीठ इस पर अपना फैसला सुनाने वाली है, तो कॉर्पोरेट जगत के साथ-साथ केरल के राजनीतिक हलकों की निगाहें भी इस निर्णय पर टिकी हैं, जो ED की जांच शक्तियों की सीमाओं को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।

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