CBSE का नया नियम: कक्षा 9 के लिए 3 भाषाओं की अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट करेगा समीक्षा, केंद्र और बोर्ड को नोटिस

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू की जा रही ‘तीन-भाषा नीति’ अब कानूनी विवादों में घिर गई है। सुप्रीम कोर्ट इस विवादित नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने के लिए तैयार हो गया है। इस नई नीति के तहत 1 जुलाई 2026 से नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है, जिसमें कम से कम दो मूल भारतीय भाषाएं होना जरूरी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पांचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार, सीबीएसई और नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस नीति के क्रियान्वयन पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी।

इसके साथ ही, अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी को इस बड़े पाठ्यक्रम बदलाव को लागू करने के लिए सीबीएसई की जमीनी और व्यावहारिक तैयारियों पर एक रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया है।

“भाषा थोपी नहीं जा सकती”: कोर्ट में क्या दी गईं दलीलें?

सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका ने छात्रों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और देश के संघीय ढांचे (Federalism) को लेकर गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े कर दिए हैं।

याचिकाकर्ता यशिका भंडारी जैन और अन्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि सीबीएसई द्वारा जारी देशव्यापी सर्कुलर छात्रों पर अचानक एक बड़ा पाठ्यक्रम बदलाव थोप रहा है, जो आगामी शैक्षणिक सत्र से ही प्रभावी होने जा रहा है।

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वहीं, अन्य याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए देश के दिग्गज वकील कपिल सिब्बल ने संघीय ढांचे और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों का हवाला दिया। सिब्बल ने पीठ के समक्ष जोर देकर कहा, “भाषा का चयन पूरी तरह से छात्र की पसंद का मामला है, इसे किसी पर भी थोपा नहीं जा सकता।”

क्या है सीबीएसई का नया ‘थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला’?

विवादों में घिरी यह नई नीति सीबीएसई द्वारा 15 मई को जारी एक सर्कुलर के जरिए सामने आई थी। इसका मुख्य उद्देश्य माध्यमिक शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCF-SE) 2023 के अनुरूप ढालना है।

इस नए नियम के तहत, कक्षा 9 के छात्रों को अनिवार्य रूप से तीन भाषाएं (जिन्हें R1, R2 और R3 नाम दिया गया है) पढ़नी होंगी:

  • दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य: चुनी गई तीन भाषाओं में से कम से कम दो का मूल भारतीय भाषा होना अनिवार्य है।
  • विदेशी भाषाओं पर बंदिश: यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो वह इसे केवल तीसरी भाषा (R3) के रूप में (दो भारतीय भाषाओं के चयन के बाद) या फिर एक अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुन सकता है।
  • तीसरी भाषा (R3) के लिए बोर्ड परीक्षा नहीं: छात्रों पर पढ़ाई का मानसिक दबाव कम करने के लिए बोर्ड ने साफ किया है कि कक्षा 10 के स्तर पर तीसरी भाषा (R3) के लिए कोई औपचारिक बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल स्तर पर आंतरिक (Internal) होगा। इस परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर किसी छात्र को बोर्ड परीक्षा देने से रोका नहीं जाएगा, हालांकि ग्रेड अंतिम रिपोर्ट कार्ड पर दर्ज होंगे।
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जमीनी मुश्किलें और सीबीएसई के अस्थायी ‘जुगाड़’

नीति को जल्दबाजी में लागू करने के फैसले से स्कूलों के सामने किताबों और पर्याप्त शिक्षकों की भारी कमी का संकट खड़ा हो गया है। इस संकट से निपटने के लिए सीबीएसई ने कुछ अस्थायी विकल्प सुझाए हैं:

  • किताबों की कमी का तोड़: चूंकि अभी कक्षा 9 के लिए R3 की नई किताबें पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए छात्र अस्थायी रूप से अपनी चुनी हुई भाषा के लिए कक्षा 6 की R3 किताबों (सत्र 2026-27 संस्करण) से पढ़ाई करेंगे।
  • क्षेत्रीय भाषाओं की उपलब्धता: 1 जुलाई से पहले 19 अनुसूचित भाषाओं की कक्षा 6 की R3 किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी। अन्य भारतीय भाषाओं के लिए स्कूलों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) या राज्य-स्तरीय पाठ्यपुस्तकों का सहारा लेने को कहा गया है। स्कूलों को 30 जून तक ओएसिस (OASIS) पोर्टल पर अपनी भाषा संबंधी जानकारी अपडेट करनी होगी।
  • शिक्षकों की कमी का विकल्प: जिन स्कूलों में भारतीय भाषाओं के योग्य शिक्षक नहीं हैं, वे अस्थाई तौर पर अन्य विषयों के उन शिक्षकों की मदद ले सकते हैं जो संबंधित भाषा में व्यावहारिक रूप से पारंगत (Functional Proficiency) हों। इसके अलावा सहोदय स्कूल क्लस्टर्स, वर्चुअल या हाइब्रिड क्लासेस, सेवानिवृत्त शिक्षकों और योग्य पोस्ट ग्रेजुएट्स की सेवाएं लेने का सुझाव भी दिया गया है।
  • लोकल कंटेंट का सहारा: स्थानीय संदर्भों को समझने के लिए स्कूलों को मुख्य पाठ्यपुस्तकों के साथ स्थानीय या राज्य-स्तरीय साहित्य (जैसे कहानियां, कविताएं या निबंध) शामिल करने की छूट होगी। इस संबंध में दिशा-निर्देश 15 जून तक जारी किए जाएंगे।
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दिव्यांग बच्चों को ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ के तहत इस नीति से छूट मिलेगी। इसके अलावा, विदेश से लौटने वाले छात्रों को भी दो भारतीय भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता से मामले के आधार पर छूट दी जा सकती है।

माध्यमिक शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी

यह तीन-भाषा नियम सीबीएसई द्वारा किए जा रहे बड़े बदलावों का सिर्फ एक हिस्सा है।

बोर्ड ने अप्रैल में ही घोषणा कर दी थी कि तीन-भाषा फॉर्मूले को कक्षा 6 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान विषयों में दो-स्तरीय (Two-level) व्यवस्था शुरू की जा रही है।

इस नई व्यवस्था के तहत गणित और विज्ञान में एक अनिवार्य ‘स्टैंडर्ड’ कोर्स होगा और एक वैकल्पिक ‘एडवांस्ड’ कोर्स होगा। सभी छात्र समान रूप से 80 अंकों की स्टैंडर्ड परीक्षा देंगे, लेकिन उच्च योग्यता चाहने वाले छात्र वैचारिक गहराई की जांच के लिए अतिरिक्त एडवांस्ड पेपर का विकल्प चुन सकेंगे। इस नए पैटर्न पर पहली कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा वर्ष 2028 में आयोजित की जाएगी।

फिलहाल, जैसे-जैसे 1 जुलाई की तारीख नजदीक आ रही है, शिक्षा जगत और अभिभावकों की निगाहें जुलाई में होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या इस बड़े बदलाव को हरी झंडी मिलती है या इस पर रोक लगती है।

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