राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में झुलसा देने वाली गर्मी और 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचते पारे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को बड़ी राहत दी है। देश की शीर्ष अदालत ने बुधवार को बार के सभी सदस्यों (वकीलों) से अपील की है कि वे चिलचिलाती धूप में शारीरिक रूप से पेश होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन अदालती कार्यवाही का हिस्सा बनें।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में कोई भी अनिवार्य ‘न्यायिक आदेश’ जारी करने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट का मानना है कि ऐसा आदेश देने से कई वकीलों के सामने तकनीकी या अन्य व्यावहारिक मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
“वरिष्ठ वकीलों के लिए इस मौसम में सफर करना ठीक नहीं”
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ इस मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में मांग की गई थी कि दिल्ली की अत्यधिक गर्मी को देखते हुए जिला अदालतों सहित सभी कोर्ट को तीन महीने के लिए पूरी तरह ऑनलाइन मोड में चलाने का निर्देश दिया जाए।
सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा:
“दिल्ली में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस को छू रहा है। ऐसे में बार के वरिष्ठ सदस्यों के लिए सार्वजनिक वाहनों का सहारा लेकर अदालत पहुंचना अनुकूल नहीं हो सकता। वर्तमान परिस्थितियों में ऑनलाइन सुनवाई ही सबसे बेहतर विकल्प है।”
याचिकाकर्ता की इस पहल की सराहना करते हुए पीठ ने स्पष्ट किया कि वे कोई थोपा हुआ आदेश जारी नहीं करना चाहते। पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता की इस कोशिश की हम सराहना करते हैं। हालांकि, वकीलों को आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को जाने बिना ऑनलाइन पेश होने का कोई न्यायिक आदेश जारी करना विवेकपूर्ण नहीं होगा। इसलिए, हम इस पर कोई औपचारिक निर्देश जारी नहीं कर रहे हैं।”
देश भर में डिजिटल कोर्ट की मुहिम तेज
वर्चुअल सुनवाई की यह अपील सुप्रीम कोर्ट की उस राष्ट्रव्यापी मुहिम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य न्याय प्रणाली को और अधिक डिजिटल बनाना है।
हाल ही में, 21 मई को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जानकारी साझा की थी कि उन्होंने देश के सभी उच्च न्यायालयों (हाई कोर्ट्स) से ऑनलाइन सुनवाई आयोजित करने का अनुरोध किया था। राहत की बात यह है कि देश के अधिकांश हाई कोर्ट ने इसे सफलतापूर्वक अपने यहां लागू भी कर दिया है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका का उल्लेख करते हुए वकील ने बताया कि तपती गर्मी के कारण रोजाना जिला अदालतों में आने-जाने वाले कानूनी पेशेवरों को गंभीर शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसे देखते हुए इस याचिका पर तुरंत विचार करना बेहद जरूरी था।
ऊर्जा संरक्षण और वैश्विक संकट से जुड़ा पहलू
सुप्रीम कोर्ट का ऑनलाइन सुनवाई पर जोर देना न केवल वकीलों को गर्मी से राहत दिलाएगा, बल्कि यह कोर्ट के उस बड़े लक्ष्य के भी अनुरूप है जिसके तहत ईंधन की बचत और प्रशासनिक खर्चों को कम करने की योजना बनाई गई है।
इससे पहले भी, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) से उत्पन्न आर्थिक दबाव के मद्देनजर सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध किया था कि वे फिलहाल सोमवार और शुक्रवार को ऑनलाइन सुनवाई का विकल्प अपनाएं ताकि अनावश्यक खर्चों को टाला जा सके।
इसी सिलसिले में 15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सोमवार और शुक्रवार को अपने सभी मामलों की सुनवाई पूरी तरह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करने का निर्णय लिया था। इसी दौरान, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने ईंधन के अधिकतम और सही उपयोग के लिए सर्वसम्मति से आपस में ‘कार-पूलिंग’ (गाड़ी साझा करने) का भी फैसला किया था। अदालत के ये कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद सामने आए थे, जिसमें उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट को देखते हुए राष्ट्रीय संस्थानों से गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने का आग्रह किया था।

