देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के पेपर लीक और उसके बाद परीक्षा रद्द होने के ऐतिहासिक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को फटकार लगाते हुए कहा कि यह “बेहद दुखद” है कि विस्तृत न्यायिक दिशानिर्देशों के बावजूद अधिकारियों ने “कोई सबक नहीं सीखा”। कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी देश भर के 22 लाख से अधिक मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य पर छाए अनिश्चितता के बादलों के बीच आई है।
इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और अदालत द्वारा गठित निगरानी समिति के अध्यक्ष को विस्तृत हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस हलफनामे में अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि 2024 के NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद गठित उच्च स्तरीय समिति की सुधार सिफारिशों को जमीन पर लागू करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
इतिहास में पहली बार पूरी परीक्षा रद्द, देश भर में फूटा गुस्सा
यह पूरा विवाद तब चरम पर पहुंच गया जब NTA ने 12 मई को एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए NEET-UG परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया। ध्यान देने वाली बात यह है कि परीक्षा इसके ठीक नौ दिन पहले, यानी 3 मई को देश भर के केंद्रों पर आयोजित की गई थी।
साल 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर NEET की शुरुआत के बाद से यह पहला मौका है जब पूरी परीक्षा को इस तरह निरस्त करना पड़ा है। इस फैसले के कारण पैदा हुआ संकट बेहद गंभीर है:
- पंजीकृत अभ्यर्थी: लगभग 22.7 लाख छात्र
- परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी: 22.05 लाख छात्र
परीक्षा रद्द होने के इस औचक फैसले के बाद छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। दिल्ली और केरल समेत देश के कई हिस्सों में छात्र संगठनों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, राजनीतिक विपक्ष ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस प्रशासनिक नाकामी ने देश के लाखों छात्रों के सपनों, उनकी कड़ी मेहनत और उनके परिवारों के त्याग को कुचल कर रख दिया है।
मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की सुप्रीम कोर्ट में गुहार, पूरे सिस्टम को बदलने की मांग
इस बड़े संकट के बीच, डॉक्टरों के प्रमुख संगठन ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (FAIMA) ने 13 मई को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एडवोकेट तन्वी दुबे के माध्यम से दायर इस याचिका में केवल कामचलाऊ समाधानों के बजाय पूरे परीक्षा तंत्र में बुनियादी और क्रांतिकारी बदलाव करने की मांग की गई है।
याचिका में भविष्य में किसी भी तरह की सुरक्षा चूक को रोकने के लिए कई प्रमुख दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है, जिनमें शामिल हैं:
- NTA का नया ढांचा: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को पूरी तरह भंग करके या इसका पुनर्गठन करके इसे एक अधिक सुरक्षित, तकनीकी रूप से बेहद उन्नत और पूरी तरह स्वायत्त संस्था बनाया जाए।
- न्यायिक निगरानी में दोबारा परीक्षा: NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा (Re-exam) का आयोजन सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एक फॉरेंसिक वैज्ञानिक की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की प्रत्यक्ष देखरेख में कराया जाए।
- अंतरिम व्यवस्था: जब तक संसद या सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय परीक्षा शुचिता आयोग’ (NEIC) का औपचारिक गठन नहीं हो जाता, तब तक यही न्यायिक समिति परीक्षा से जुड़े सभी ऑपरेशन्स की कमान संभाले।
- राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें: परीक्षा कराने वाली संस्था को के. राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट में दिए गए सुरक्षा और कार्यकुशलता संबंधी सुझावों को पूरी सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुपालन हलफनामा मांगे जाने के बाद अब NTA और उसकी निगरानी समिति पर यह साबित करने का भारी दबाव है कि वे देश के परीक्षा तंत्र को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए गंभीर हैं।
अब सबकी नजरें अदालत की अगली सुनवाई और इस बात पर टिकी हैं कि लाखों प्रभावित छात्रों के लिए एक सुरक्षित, निष्पक्ष और लीक-प्रूफ दोबारा परीक्षा का आयोजन कब और कैसे किया जाता है।

