गुरुग्राम बिजली विवाद: प्रदूषण बोर्ड के बैन के बाद भी चल रही थी कंस्ट्रक्शन साइट? हाई कोर्ट में DHBVN अधिकारी के खिलाफ अवमानना याचिका

हरियाणा के गुरुग्राम में नियमों के उल्लंघन के आरोप में बंद की गई एक कंस्ट्रक्शन साइट पर बिजली सप्लाई को लेकर नया कानूनी मोर्चा खुल गया है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के एक वरिष्ठ अधिकारी पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को गुमराह करने और गलत हलफनामा पेश करने के आरोप लगे हैं। इस मामले में कोर्ट के आदेशों की कथित अनदेखी को लेकर अधिकारी के खिलाफ अवमानना याचिका (Contempt Petition) दायर की गई है।

यह पूरा मामला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशों के बावजूद एक प्रतिबंधित कंस्ट्रक्शन साइट को बिजली आपूर्ति जारी रखने और कोर्ट के सामने उसकी गलत जानकारी देने से जुड़ा है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत 12 दिसंबर 2025 को हुई थी, जब केंद्र सरकार की एजेंसी ‘कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट’ (CAQM) ने वायु प्रदूषण और निर्माण गतिविधियों से जुड़े नियमों के उल्लंघन के कारण सेक्टर 27 स्थित ‘राजदरबार आइकॉनिक वेंचर्स लिमिटेड’ की कंस्ट्रक्शन साइट को तुरंत बंद करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही CAQM ने DHBVN और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत संबंधित विभागों को इस साइट का बिजली कनेक्शन तुरंत काटने का निर्देश दिया था।

याचिकाकर्ता और गुरुग्राम निवासी रामधन का आरोप है कि इस आदेश के बाद भी साइट को बिजली की सप्लाई जारी रही। याचिका के अनुसार, DHBVN ने 28 जनवरी 2026 को कोर्ट में एक अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश की, जिसमें दावा किया गया कि निरीक्षण के दौरान साइट पर कोई बिजली कनेक्शन नहीं पाया गया और वहां कोई सप्लाई नहीं दी जा रही थी। इसके बाद, DHBVN के कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer) विकास यादव ने 18 मई 2026 को कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर इसी दावे को दोहराया।

बिजली के बिल ने खोली पोल

अधिकारी के दावों के विपरीत, याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के सामने पुख्ता सबूत पेश किए हैं। कोर्ट में सौंपे गए दस्तावेजों में ‘कृषम प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम पर सेक्टर 27 की इसी संपत्ति के लिए जारी जनवरी 2026 का एक एक्टिव बिजली बिल शामिल है।

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याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह बिल साफ तौर पर साबित करता है कि प्रतिबंध के बावजूद साइट पर या उसके आसपास बिजली का इस्तेमाल हो रहा था, जो सीधे तौर पर बिजली विभाग के दावों को झूठा साबित करता है।

हाई कोर्ट का कड़ा रुख

इस विसंगति पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। 6 मई को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हरियाणा सरकार और DHBVN को इस मामले में कड़ी फटकार लगाई थी और पूछा था कि जब विभाग का दावा है कि वहां कोई कनेक्शन ही नहीं है, तो फिर एक्टिव बिजली का बिल कैसे जनरेट हो रहा है? कोर्ट ने इस विरोधाभास पर विभाग से स्पष्टीकरण मांगा था।

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कोर्ट की अवमानना की मांग

ताजा याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोर्ट की गंभीर टिप्पणियों और जमीन के कुछ हिस्सों पर मालिकाना हक का दावा करने वाले अन्य निजी पक्षों द्वारा बिजली इस्तेमाल की बात स्वीकार किए जाने के बावजूद, DHBVN अधिकारी लगातार अपने पुराने रुख पर अड़े हुए हैं।

याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि अधिकारी का यह अड़ियल रवैया कोर्ट को दिए गए आश्वासन का खुला उल्लंघन है। याचिका में ‘न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971’ (Contempt of Courts Act, 1971) के तहत कार्यकारी अभियंता विकास यादव के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है। साथ ही कोर्ट से अपील की गई है कि वह CAQM के मूल आदेश को पूरी तरह लागू करवाते हुए साइट पर बची हुई किसी भी बिजली लाइन को तुरंत काटने का निर्देश दे।

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