पश्चिम एशिया में गहराते संकट और बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच भारतीय न्यायपालिका ने खर्चों और ईंधन की खपत को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने देश के सभी उच्च न्यायालयों (High Courts) से अदालती कार्यवाही को ऑनलाइन मोड पर ले जाने का अनुरोध किया है। CJI ने जानकारी दी है कि देश के अधिकांश हाई कोर्ट्स ने इस डिजिटल बदलाव को पहले ही अपना लिया है।
यह बात गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आई, जब एक वकील ने दिल्ली की सभी अदालतों को तत्काल ऑनलाइन करने के संबंध में दायर अपनी याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की थी।
डिजिटल अदालतों का समर्थन करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव आपसी सहयोग पर निर्भर करता है। CJI ने कहा, “मैंने पहले ही सभी मुख्य न्यायाधीशों से इस संबंध में अनुरोध किया है और अधिकांश ने इसे लागू भी कर दिया है। यह बार (वकीलों) और बेंच (जजों) दोनों की इच्छा और आपसी सहयोग से किया जाने वाला एक स्वैच्छिक प्रयास होना चाहिए।”
जिला अदालतों पर फैसला राज्यों के हाई कोर्ट ही लेंगे
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए देश की सभी जिला अदालतों (District Courts) को भी अगले तीन महीनों के लिए अनिवार्य रूप से ऑनलाइन करने की मांग की, तो CJI ने न्यायपालिका के प्रशासनिक ढांचे को स्पष्ट किया।
CJI सूर्य कांत ने क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए कहा, “जिला अदालतें सीधे तौर पर राज्यों के हाई कोर्ट्स के प्रशासनिक दायरे में आती हैं। इसलिए, इस पर फैसला लेने का अधिकार उन्हीं का है।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे जिला अदालतों को लेकर भी सभी हाई कोर्ट्स से पहले ही अनुरोध कर चुके हैं।
फिजूलखर्ची रोकने के लिए देशव्यापी रणनीति
अदालतों को वर्चुअल मोड पर लाने का यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के कारण बन रहे आर्थिक हालातों को देखते हुए सभी सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों से फिजूलखर्ची और अनावश्यक खर्चों को कम करने का आग्रह किया था।
इसी रणनीति के तहत, CJI सूर्य कांत ने सोमवार को ही देश के सभी हाई कोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर फिलहाल हर सोमवार और शुक्रवार को वर्चुअल सुनवाई आयोजित करने को कहा था ताकि ईंधन के खर्च को बचाया जा सके।
खुद देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने भी इस दिशा में मिसाल पेश की है। बीते 15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय लिया था कि प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को सभी मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ईंधन के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से आपस में ‘कारपूल’ (एक गाड़ी साझा करने) की व्यवस्था को अपनाने का भी संकल्प लिया है।

