दिल्ली बार काउंसिल (BCD) के चुनावों में पारदर्शिता और शुचिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को वोटों की गिनती पर लगी अपनी अंतरिम रोक को हटाने या उसमें कोई भी बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया। मतपत्रों (ballot papers) में कथित हेरफेर और धांधली के गंभीर आरोपों को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दिया है। हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह सोमवार, 25 मई 2026 से इस मामले की रोजाना (डे-टू-डे) सुनवाई शुरू करे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने के लिए यथास्थिति (status quo) बनाए रखना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक हाईकोर्ट इस मामले पर किसी अंतिम फैसले पर नहीं पहुँच जाता, तब तक मतपत्रों की गिनती पूरी तरह स्थगित रहेगी।
विवाद की पृष्ठभूमि
दिल्ली बार काउंसिल चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और मतपत्रों से छेड़छाड़ के आरोपों के बाद यह चुनावी विवाद देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर पहुँचा था। इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई को अंतरिम आदेश जारी कर वोटों की गिनती पर रोक लगा दी थी।
मामले में एक नया मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने खुलासा किया कि उसे 2 मई को पूर्व हाईकोर्ट जज तलवंत सिंह की ओर से एक सीलबंद लिफाफे में एक पत्र मिला था। इस पत्र में दिल्ली बार काउंसिल की चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर चिंताओं और गड़बड़ियों का ब्योरा दिया गया था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने निर्देश दिया कि इस पत्र को दोबारा सील कर सीधे दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाए ताकि आगामी सुनवाई के दौरान इसकी मदद ली जा सके।
दलीलें: अधूरी गिनती रोकने का जोखिम बनाम मतपत्रों की सुरक्षा
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत से 18 मई के अंतरिम आदेश में संशोधन करने और मतगणना को फिर से शुरू करने की गुहार लगाई। उन्होंने दलील दी कि मतगणना को बीच में रोकना व्यावहारिक रूप से सही नहीं है और इससे पहले से डाले जा चुके वोटों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं।
विकास सिंह ने कोर्ट के समक्ष कहा, “वोटों की गिनती इस समय जारी है। इसे पूरा होने दिया जाए। इसके परिणामों को जारी करना हाईकोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन रखा जा सकता है।” उन्होंने आशंका जताई कि वोटों की गिनती रोककर उन्हें इस तरह अनकैप्ड या “बिखरा हुआ” छोड़ने से मतपत्रों के साथ भौतिक रूप से छेड़छाड़ (physical tampering) की गुंजाइश और अधिक बढ़ जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और हाईकोर्ट को तत्काल आदेश
सुप्रीम कोर्ट की पीठ वरिष्ठ वकील की इन दलीलों से बिल्कुल भी सहमत नजर नहीं आई। अदालत ने जोर देकर कहा कि वह उन आरोपों को नजरअंदाज नहीं कर सकती जिनमें कहा गया है कि कथित रूप से हेरफेर या टेंपर किए गए मतपत्रों को भी मतगणना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल किया जा रहा था।
वरिष्ठ वकील की दलीलों का जवाब देते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट रूप से कहा:
“हम अपने आदेश में कोई बदलाव नहीं करेंगे… दिल्ली बार काउंसिल (BCD) के चुनावों को लेकर बहुत ही गंभीर मुद्दे सामने आए हैं।”
मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए, शीर्ष अदालत ने तय किया कि इस विवाद की गहन कानूनी और तथ्यात्मक जांच दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा तेजी से की जानी चाहिए। मिसलेनियस एप्लीकेशन (MA) को रिकॉर्ड पर लेते हुए पीठ ने आदेश दिया:
“चूंकि यह मामला बेहद जरूरी है, इसलिए हम दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं कि वे सोमवार को ही इस मामले को तत्काल एक डिविजन बेंच (खंडपीठ) के समक्ष लिस्ट करें। सभी पक्षों को अपनी पूरी दलीलें पेश करने की पूरी स्वतंत्रता होगी।”
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य चीफ जस्टिस से इस विवाद के निपटारे के लिए एक विशेष डिविजन बेंच गठित करने और रोजाना आधार पर सुनवाई पूरी करने का आग्रह किया।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने साफ किया कि उसने “इस मामले के गुण-दोष (merits) पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।” कोर्ट ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने तक यथास्थिति बनाए रखने के लिए “मतपत्रों की आगे की गिनती को स्थगित” रखा जाए।

