बरेली हिंसा मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट से आरोपी अल्तमश खान को मिली अग्रिम जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले साल बरेली में हुई हिंसक झड़प के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले के सह-आरोपी अल्तमश खान को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे दी है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव ने अल्तमश की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें राहत दी।

अल्तमश खान ने कोर्ट में खुद को पूरी तरह बेकसूर बताते हुए दावा किया था कि इस पूरी घटना में उन्हें झूठा फंसाया गया है।

कोर्ट में बचाव पक्ष ने क्या दलीलें दीं?

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अल्तमश खान के वकील ने पुरजोर तरीके से उनका पक्ष रखा। वकील ने दलील दी कि बरेली हिंसा से उनके मुवक्किल का कोई लेना-देना नहीं है।

बचाव पक्ष ने अदालत का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया कि घटना के बाद पुलिस द्वारा दर्ज की गई शुरुआती प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) में अल्तमश खान का नाम शामिल नहीं था। वकील के अनुसार, इस आपराधिक मामले में बाद में बिना किसी ठोस सबूत या भूमिका के अल्तमश को गलत तरीके से आरोपी बना दिया गया।

कैसे शुरू हुआ था बरेली का यह विवाद?

यह पूरा मामला पिछले साल 26 सितंबर को बरेली में भड़की हिंसा से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, घटना की शुरुआत तब हुई जब मौलाना तौकीर रजा ने एक समुदाय विशेष के लोगों को बरेली के इस्लामिया इंटर कॉलेज में एकत्र होने का आह्वान किया था।

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उस समय कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा (निषेध आदेश) लागू थी। इसके बावजूद, लगभग 500 लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस भीड़ ने मौलाना आजाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहे की ओर मार्च करना शुरू कर दिया।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी अपने हाथों में तख्तियां लिए हुए थे और उत्तेजक नारेबाजी कर रहे थे। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने भीड़ को समझाने और उन्हें तितर-बितर होने की चेतावनी दी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इन अपीलों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

पथराव, एसिड की बोतलें और आत्मरक्षा में पुलिस की कार्रवाई

पुलिस के मुताबिक, देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई क्योंकि आगे बढ़ने पर अड़ी भीड़ हिंसक हो उठी और उसने पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश की।

दर्ज मामले के अनुसार, उपद्रवियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल पर हमला कर दिया। भीड़ की तरफ से पुलिसकर्मियों पर पत्थर, ईंटें और तेजाब (एसिड) से भरी बोतलें फेंकी गईं। इतना ही नहीं, हिंसक भीड़ के बीच से पुलिस टीम पर गोलियां भी चलाई गईं।

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एफआईआर के मुताबिक, इस अचानक हुए हमले से पूरे इलाके में “दहशत का माहौल” बन गया। इस हिंसक झड़प में पुलिसकर्मियों की वर्दियां फट गईं और दो अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। जब उपद्रवियों को समझाने-बुझाने के सारे प्रयास विफल हो गए, तो पुलिस बल को स्थिति पर नियंत्रण पाने और अपनी आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

फिलहाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट से अल्तमश खान को अग्रिम जमानत मिलने के बाद अब इस पूरे मामले की कानूनी कार्यवाही पर नजरें टिकी हुई हैं।

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