वाराणसी में गंगा नदी के बीचों-बीच चलती नाव पर इफ्तार पार्टी और मांसाहार के सेवन से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार कुछ आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की पीठ ने शुक्रवार को यह आदेश पारित किया।
हालांकि, सभी आरोपियों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। अदालत ने मामले के कुछ अन्य आरोपियों की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 18 मई की तारीख तय की है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत इस साल रमजान के महीने में 15 मार्च को हुई थी। आरोप है कि वाराणसी में गंगा नदी के बीच एक नाव पर इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था, जिसमें मांस का सेवन किया गया। शिकायत के अनुसार, पार्टी के बाद बचा हुआ मांसाहार का कचरा पवित्र गंगा नदी में ही फेंक दिया गया।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर काफी विरोध हुआ था। 16 मार्च को भाजपा युवा मोर्चा के वाराणसी अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इस कृत्य से करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है और पवित्र स्थान को अपवित्र करने की कोशिश की गई है।
अदालती कार्यवाही और कानूनी दलीलें
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें धार्मिक भावनाओं को आहत करने और पूजा स्थल को अपवित्र करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किलों को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। बचाव पक्ष का यह भी तर्क था कि प्रारंभिक प्राथमिकी (FIR) में इन व्यक्तियों के नाम शामिल नहीं थे।
इससे पहले, निचली अदालत ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया था। 1 अप्रैल को वाराणसी की एक सत्र अदालत ने आरोपियों की जमानत अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनके कार्यों से सामाजिक सद्भाव बिगड़ने की आशंका प्रतीत होती है।
अब हाईकोर्ट द्वारा कुछ आरोपियों को जमानत मिलने के बाद, कानूनी जानकारों की नजर 18 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर है, जहां शेष याचिकाकर्ताओं के भाग्य का फैसला होगा।

