पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत के उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने एक ऐतिहासिक प्रशासनिक बदलाव का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन संरक्षण (Fuel Conservation) की अपील के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने अब सोमवार और शुक्रवार को पूरी तरह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करने का फैसला किया है।
न्यायालय के इस कदम का मुख्य उद्देश्य यात्रा से होने वाले ईंधन खर्च को कम करना और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती देना है।
नई कार्यप्रणाली: हाइब्रिड और वर्चुअल का तालमेल
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सप्ताह के हर सोमवार और शुक्रवार को अदालत की कार्यवाही केवल ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जाएगी। वहीं, मंगलवार से गुरुवार तक ‘हाइब्रिड मॉडल’ प्रभावी रहेगा, जिसमें वकीलों और याचिकाकर्ताओं के पास अदालत में शारीरिक रूप से उपस्थित होने या वर्चुअल तरीके से जुड़ने का विकल्प होगा।
यह नई व्यवस्था न केवल हजारों कानूनी पेशेवरों के दैनिक आवागमन को कम करेगी, बल्कि अदालती कामकाज में डिजिटल तकनीक के उपयोग को भी बढ़ावा देगी।
जजों ने पेश की मिसाल: करेंगे कार-पूलिंग
सिर्फ सुनवाई ही नहीं, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों ने व्यक्तिगत स्तर पर भी ईंधन बचाने का संकल्प लिया है। एक सामूहिक संकल्प के माध्यम से, न्यायाधीशों ने ‘कार-पूलिंग’ अपनाने का निर्णय लिया है ताकि आधिकारिक वाहनों का उपयोग कम से कम और प्रभावी ढंग से किया जा सके।
इसके अलावा, कोर्ट की रजिस्ट्री (Registry) के कामकाज में भी बदलाव किए गए हैं। अब रजिस्ट्री के विभिन्न विभागों में 50 प्रतिशत तक कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) की अनुमति दी गई है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि इससे न्यायिक कार्यों की निरंतरता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर भौतिक उपस्थिति अनिवार्य हो सकती है।
प्रधानमंत्री की अपील और आर्थिक संदर्भ
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस हालिया आह्वान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों से ईंधन की खपत कम करने का आग्रह किया था। पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया था कि जो क्षेत्र संभव हों, वहां ‘वर्क फ्रॉम होम’ की संस्कृति को फिर से अपनाकर ईंधन की बचत की जा सकती है। देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा इस सुझाव को संस्थागत रूप देना, संकट के समय में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है।

