कर्नाटक हाई कोर्ट ने खारिज की हज यात्रा का किराया 10,000 रुपये बढ़ाने के खिलाफ याचिका

कर्नाटक हाई कोर्ट ने हज यात्रियों के हवाई किराए में 10,000 रुपये की बढ़ोतरी को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। 7 मई को दिए गए अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास इस मामले को चुनौती देने का कोई कानूनी अधिकार (locus standi) नहीं है, क्योंकि उसने न तो हज के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था और न ही कोई पैसा जमा किया था।

क्या है पूरा मामला? 

यह विवाद हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा 28 अप्रैल, 2026 को जारी किए गए एक सर्कुलर से जुड़ा है। इस सर्कुलर में सभी हज यात्रियों से हवाई किराए के रूप में 10,000 रुपये अतिरिक्त मांगे गए थे। कमेटी का कहना था कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसके चलते एयरलाइंस ने किराए में बढ़ोतरी की मांग की थी।

याचिकाकर्ता की दलीलें 

कोलार जिले के रहने वाले यूनुस खान ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए इस बढ़ोतरी का विरोध किया था। उनके वकील सुहैल दिल नवाज ने कोर्ट में तर्क दिया कि अधिकारियों ने हज यात्रियों से पहले ही 2,77,300 रुपये वसूल लिए हैं। उनकी दलील थी कि चूंकि टिकट काफी पहले बुक हो चुके थे, इसलिए अब पश्चिम एशिया के संकट और ईंधन की कीमतों का हवाला देकर अतिरिक्त पैसे नहीं मांगे जा सकते।

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हाई कोर्ट का फैसला 

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस एस. विश्वजीत शेट्टी ने रिकॉर्ड खंगालने के बाद पाया कि यूनुस खान ने खुद को हज यात्री के रूप में पंजीकृत ही नहीं कराया था।

जस्टिस शेट्टी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया, “28.04.2026 के सर्कुलर के माध्यम से 10,000 रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग केवल हज 2026 के उन यात्रियों से की गई है, जिन्होंने हज कमेटी के साथ अपना नाम पंजीकृत कराया है और पैसे जमा किए हैं।”

चूंकि याचिकाकर्ता पर इस सर्कुलर का कोई सीधा असर नहीं पड़ रहा था, इसलिए कोर्ट ने उसे राहत देने से इनकार कर दिया। बेंच ने कहा, “इन परिस्थितियों में, याचिकाकर्ता को उक्त सर्कुलर से कोई शिकायत नहीं हो सकती है, और इसलिए, उसे इस पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है।” कोर्ट ने याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया।

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किराया बढ़ाने पर सरकार का पक्ष और सियासी घमासान 

किराए में बढ़ोतरी का बचाव करते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने कहा कि यह एक “वैश्विक आपातकाल” का नतीजा है जो किसी भी सरकार के नियंत्रण से बाहर है। मंत्रालय के मुताबिक, मिडिल ईस्ट संकट के कारण एयरलाइंस ने प्रति यात्री 300 से 400 डॉलर अतिरिक्त मांग की थी। काफी बातचीत के बाद मंत्रालय ने केवल 100 डॉलर (लगभग 10,000 रुपये) की बढ़ोतरी को मंजूरी दी।

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