दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: ‘शार्क टैंक’ जज अमन गुप्ता के ‘पर्सनालिटी राइट्स’ सुरक्षित, AI और डीपफेक के जरिए दुरुपयोग पर लगाई रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए ‘boAt’ के सह-संस्थापक और उद्यमी अमन गुप्ता के ‘पर्सनालिटी’ और ‘पब्लिसिटी राइट्स’ (व्यक्तित्व अधिकारों) को सुरक्षा प्रदान की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी तीसरा पक्ष अमन गुप्ता की अनुमति के बिना उनके नाम, फोटो, आवाज और उनके सिग्नेचर डायलॉग्स का व्यावसायिक उपयोग नहीं कर सकता है। विशेष रूप से, यह आदेश AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा बनाए गए डीपफेक और चैटबॉट्स के जरिए हो रहे दुरुपयोग को रोकने के लिए दिया गया है।

यह मामला ‘शार्क टैंक इंडिया’ के जज अमन गुप्ता द्वारा दायर किया गया था, जिन्होंने अपनी पहचान और व्यक्तित्व के अनधिकृत व्यावसायिक शोषण के खिलाफ कानूनी हस्तक्षेप की मांग की थी। 7 मई को दिए गए अपने आदेश में, हाईकोर्ट ने उनके व्यक्तित्व अधिकारों और पंजीकृत ट्रेडमार्क के उल्लंघन को रोकने के लिए अंतरिम निर्देश जारी किए हैं।

अमन गुप्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि कई संस्थाएं और व्यक्ति उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। याचिका के अनुसार, निम्नलिखित गतिविधियों के जरिए उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा था:

  • उनके मशहूर ‘कैचफ्रेज’ और नारों का इस्तेमाल कर कपड़े और अन्य सामान (Merchandise) बेचना।
  • उनकी आवाज और व्यक्तित्व की नकल करने वाले AI-आधारित चैटबॉट्स का संचालन करना।
  • ऐसे कार्यक्रमों की सूची बनाना जिनमें उन्हें झूठा अतिथि (Guest) दिखाया गया हो।
  • उनके नाम से अश्लील लिंक, GIFs और उनके फर्जी संपर्क विवरण (Contact Details) साझा करना।
  • इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके नाम से फर्जी प्रोफाइल चलाना।
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इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस तुषार गेडेला ने कहा कि अमन गुप्ता ने अपने करियर के छोटे से अंतराल में ही उद्योग जगत में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। कोर्ट ने माना कि कुछ संस्थाएं उनके नाम, आवाज, व्यक्तित्व और ट्रेडमार्क का अनुचित लाभ उठा रही हैं, जो पूरी तरह से उनके विशेष अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

अदालत ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल निर्देश जारी किए। आदेश के मुताबिक, प्रतिवादियों को अमन गुप्ता की लिखित अनुमति के बिना उनके नाम, छवि, आवाज, वीडियो, GIF या उनके व्यक्तित्व के किसी भी पहलू का उपयोग करने से रोक दिया गया है।

कोर्ट ने तकनीकी विकास को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से “AI, डीपफेक तकनीक या किसी भी अन्य माध्यम” से होने वाले शोषण को इस प्रतिबंध के दायरे में रखा है। इसके अतिरिक्त कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. कंटेंट हटाना: मेटा (Meta) और गूगल (Google) जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को आदेश दिया गया है कि वे याचिका में चिह्नित उल्लंघनकारी कंटेंट को तुरंत हटाएं।
  2. विवरण साझा करना: इन प्लेटफॉर्म्स को कथित अपराधियों और उल्लंघनकर्ताओं का विवरण भी कोर्ट को देना होगा।
  3. ट्रेडमार्क सुरक्षा: प्रतिवादियों को अमन गुप्ता के उन नारों और वाक्यांशों का उपयोग करने से मना किया गया है जो उनके नाम पर पंजीकृत ट्रेडमार्क हैं।
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यह आदेश उन जन हस्तियों की लंबी सूची में एक और नाम जोड़ता है जिन्होंने अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इससे पहले अभिनेता ऐश्वर्या राय बच्चन, अमिताभ बच्चन, सलमान खान, सोनाक्षी सिन्हा, विवेक और अल्लू अर्जुन के साथ-साथ क्रिकेटर गौतम गंभीर को भी कोर्ट से ऐसी ही राहत मिल चुकी है। इसके अलावा श्री श्री रविशंकर, पत्रकार सुधीर चौधरी और सांसद शशि थरूर जैसे व्यक्तित्वों के मामले में भी हाईकोर्ट ने इसी तरह के अंतरिम संरक्षण प्रदान किए हैं।

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