आम आदमी पार्टी (AAP) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। शुक्रवार को हुई एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान, पंजाब सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि आगामी सोमवार तक पाठक के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष राज्य सरकार के वकील ने यह आश्वासन दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी, जिसमें पाठक के खिलाफ दर्ज दो ‘गोपनीय’ एफआईआर (FIR) से जुड़े तथ्यों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
संदीप पाठक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पंजाब सरकार और पुलिस को उनके खिलाफ दर्ज दो एफआईआर की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश देने की मांग की है। पाठक का आरोप है कि उन्हें इन मामलों के बारे में केवल मीडिया रिपोर्टों और अनौपचारिक माध्यमों से पता चला है, जबकि पुलिस प्रशासन ने एफआईआर नंबर, पंजीकरण की तारीख और संबंधित थानों जैसी बुनियादी जानकारी भी साझा नहीं की है।
याचिका में दावा किया गया है कि इन एफआईआर को पंजाब पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड न करना नियमों का खुला उल्लंघन है। पाठक ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” करार देते हुए कहा है कि उन्हें परेशान करने के लिए जानबूझकर विवरण छिपाए जा रहे हैं।
यह कानूनी विवाद पंजाब की राजनीति में आए एक बड़े भूचाल के बीच शुरू हुआ है। गौरतलब है कि 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा था, जब उसके 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
इस्तीफा देने वाले सांसदों में संदीप पाठक के अलावा राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल थे। इनमें से छह सांसद पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन सभी सांसदों ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी पर अपने सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से भटकने का आरोप लगाया और बाद में भाजपा में शामिल हो गए।
संदीप पाठक का तर्क है कि भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद इन आपराधिक मामलों का सामने आना सीधे तौर पर उनकी नई राजनीतिक पारी से जुड़ा है। अब सोमवार को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि क्या हाई कोर्ट पंजाब पुलिस को इन एफआईआर के विवरण तुरंत उजागर करने का आदेश देती है।

