IAS ऑफिसर के फार्म हाउस पर जुए की रेड: सस्पेंड हुए SI को हाई कोर्ट ने दी बड़ी राहत, कहा- ‘यह कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोरने वाला मामला’

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रशासनिक रसूख और दबाव की राजनीति के खिलाफ एक बड़ा फैसला सुनाते हुए उस पुलिस अधिकारी का निलंबन (Suspension) रद्द कर दिया है, जिसे एक महिला IAS अधिकारी के फार्म हाउस पर रेड करने की सजा दी गई थी। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन करने के लिए किसी अधिकारी को दंडित करना न्यायपालिका की ‘अंतरात्मा को झकझोर’ देने वाला कृत्य है।

हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने गुरुवार को सब-इंस्पेक्टर लोकेंद्र सिंह हिलोरे के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार की कार्रवाई को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और बदले की भावना से प्रेरित करार दिया।

यह घटना 10 और 11 मार्च की दरमियानी रात की है, जब मानपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी और 2007 बैच के अधिकारी लोकेंद्र सिंह हिलोरे ने एक गुप्त सूचना के आधार पर अवलीपुरा गांव के एक प्राइवेट फार्म हाउस पर छापा मारा था। यह फार्म हाउस एक कार्यरत महिला IAS अधिकारी का था। पुलिस की इस छापेमारी में 18 लोगों को जुआ खेलते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया, जबकि 6 अन्य लोग मौके से भागने में सफल रहे।

कोर्ट में पेश याचिका के अनुसार, रेड के तुरंत बाद हिलोरे पर उच्च अधिकारियों का भारी दबाव आने लगा। उनसे कहा गया कि या तो वे FIR दर्ज न करें या फिर घटनास्थल का पता बदल दें, ताकि IAS अधिकारी और उनके फार्म हाउस का नाम सामने न आए।

जब सब-इंस्पेक्टर ने इस अवैध दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया और सही लोकेशन के साथ FIR दर्ज की, तो अगले ही दिन 11 मार्च को पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया।

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सरकार की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि हिलोरे ने इंटेलिजेंस जुटाने में लापरवाही बरती और मीटिंग्स में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। जस्टिस पिल्लई ने कहा, “एक तरफ आप कह रहे हैं कि अधिकारी इंटेलिजेंस जुटाने में विफल रहा, जबकि दूसरी तरफ उसी अधिकारी ने सटीक सूचना के आधार पर एक सफल छापेमारी को अंजाम दिया। सरकार की दलीलें विरोधाभासी हैं।”

कोर्ट ने यह भी गौर किया कि हिलोरे ने उच्चाधिकारियों द्वारा दबाव बनाए जाने के जो गंभीर आरोप लगाए थे, सरकार ने अपने जवाब में उन पर चुप्पी साधे रखी।

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अदालत ने चेतावनी दी कि यदि ऐसे “घिसे-पिटे और मनमाने” निलंबन आदेशों को अनुमति दी गई, तो भविष्य में कोई भी पुलिस अधिकारी किसी प्रभावशाली व्यक्ति के ठिकानों पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा।

निलंबन रद्द करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के रखवालों को प्रशासनिक प्रतिशोध से बचाना अनिवार्य है, ताकि वे बिना किसी डर के अपनी ड्यूटी निभा सकें।

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