बॉम्बे हाईकोर्ट ने पीएम मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट मामले में आरोपी डॉक्टर को विदेश जाने की अनुमति दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) में सलाहकार के रूप में कार्यरत डॉ. संग्राम पाटिल को विदेश यात्रा की अनुमति दे दी है। अदालत ने उनके खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर (LOC) में संशोधन करने का निर्देश दिया है। यह यात्रा प्रतिबंध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित भ्रामक पोस्ट से जुड़ी आपराधिक जांच के कारण लगाया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी मुद्दा

याचिकाकर्ता डॉ. संग्राम पाटिल 10 जनवरी 2026 से भारत में रुके हुए थे, क्योंकि उनके खिलाफ 22 दिसंबर 2025 को एक LOC जारी किया गया था। यह मामला एक फेसबुक पेज “शहर विकास अघाड़ी” से संबंधित है, जिस पर आरोप था कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व के खिलाफ “गलत सूचना और झूठ” फैलाया है।

एन.एम. जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन में दिसंबर 2025 में दर्ज FIR के बाद डॉ. पाटिल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने FIR और LOC को रद्द करने की मांग की थी। डॉ. पाटिल का तर्क था कि यात्रा प्रतिबंध के कारण ब्रिटेन में उनकी नौकरी खतरे में है। कार्यवाही के दौरान उन्होंने 24 मार्च 2026 के अपने हलफनामे में कहा:

“पुनर्विचार करने पर, मुझे एहसास हुआ कि उक्त पोस्ट में उपयोग की गई भाषा को कठोर और अनुचित माना जा सकता है। मैं ईमानदारी से कहता हूं कि यदि संबंधित पोस्ट से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मुझे इसका खेद है। यह बयान सद्भावनापूर्वक और किसी अपराध को स्वीकार किए बिना दिया गया है।”

पक्षों की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव शकधर ने तर्क दिया कि डॉ. पाटिल को अपनी ड्यूटी पर लौटने की आवश्यकता है, अन्यथा उन्हें नौकरी से हटाया जा सकता है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि याचिकाकर्ता और उनके माता-पिता (जो भारत के स्थायी निवासी हैं) अदालत को वचन (undertaking) देंगे कि जांच अधिकारी द्वारा बुलाए जाने पर डॉ. पाटिल भारत में उपस्थित होंगे।

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महाराष्ट्र राज्य के एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने अदालत को सूचित किया कि जांच जारी है, लेकिन विभिन्न एजेंसियों से रिपोर्ट मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि 20 अप्रैल 2026 से तीन सप्ताह के भीतर रिपोर्ट नहीं मिलती है, तो राज्य को LOC में संशोधन करने पर कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते याचिकाकर्ता और उनके माता-पिता 15 दिन के अग्रिम नोटिस पर जांच के लिए उपस्थित होने की गारंटी दें।

अदालत का विश्लेषण और निर्णय

अदालत ने पाया कि याचिका 15 अप्रैल 2026 को स्वीकार की गई थी। इसके बाद, याचिकाकर्ता और उनके माता-पिता (श्री गोकुलसिंह इंद्रसिंह पाटिल और श्रीमती कल्पना गोकुलसिंह पाटिल) ने 24 अप्रैल 2026 को औपचारिक वचन पत्र दाखिल किए।

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एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने पुष्टि की कि राज्य सरकार इन वचनों से संतुष्ट है। जस्टिस अश्विन डी. भोबे ने इन्हें अदालत के समक्ष आधिकारिक बयान और वचन के रूप में स्वीकार किया।

अदालत ने आदेश दिया:

“प्रतिवादी नंबर 1 द्वारा 22 दिसंबर 2025 (पठित 10 जनवरी 2026) के LOC में संशोधन किया जाएगा। स्पष्ट किया जाता है कि… उक्त LOC में संशोधन के आधार पर, याचिकाकर्ता भारत से बाहर यात्रा करने में सक्षम होंगे।”

राज्य को 11 मई 2026 तक संबंधित अधिकारियों को इस संशोधन के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने दर्ज किया कि यात्रा प्रतिबंधों के संबंध में वर्तमान में किसी अन्य आदेश की आवश्यकता नहीं है।

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केस विवरण:

केस टाइटल: डॉ. संग्राम पाटिल बनाम विलास रामचंद्र राणे और अन्य

केस नंबर: क्रिमिनल रिट पिटीशन नंबर 1409 ऑफ 2026

बेंच: जस्टिस अश्विन डी. भोबे

तारीख: 05 मई 2026

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