केरल हाईकोर्ट का सख्त रुख: पशु मंडियों में क्रूरता के आरोपों पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी

केरल हाईकोर्ट ने राज्य की पशु मंडियों (Cattle Markets) में मवेशियों के साथ हो रही कथित क्रूरता के मामले में हस्तक्षेप किया है। शुक्रवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए, हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से इस गंभीर मुद्दे पर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पालतू मवेशियों को मंडियों में “असहनीय पीड़ा” झेलनी पड़ रही है।

यह मामला पशु अधिकार कार्यकर्ता एंजल्स नायर द्वारा दायर किया गया है, जिसमें विशेष रूप से पेरुंबावुर जैसी नगर पालिकाओं और स्थानीय निकायों द्वारा संचालित मंडियों की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डाला गया है।

जनहित याचिका में केरल के पशु व्यापार की एक भयावह तस्वीर पेश की गई है। याचिका के अनुसार, मवेशियों को चिलचिलाती धूप में पूरे दिन बिना पानी और बिना किसी छांव के बांधकर रखा जाता है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि केवल इस आधार पर उनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती कि उन्हें कुछ दिनों बाद वध के लिए ले जाया जाएगा। याचिका में कहा गया, “मवेशियों का एक-दो दिनों में वध कर दिया जाएगा, यह उन्हें इस तरह की असहनीय पीड़ा देने का कोई बहाना नहीं हो सकता।”

कानूनी तौर पर, यह याचिका बताती है कि ये मंडियां पशु कल्याण के लिए बने स्थापित नियमों का सीधा उल्लंघन कर रही हैं। मुख्य रूप से निम्नलिखित नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है:

  • पशु क्रूरता निवारण (पशुधन बाजार नियमन) नियम, 2017।
  • राष्ट्रीय हीट वेव एडवाइजरी: मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा ‘हीट वेव की स्थिति में पशुधन’ के संबंध में जारी दिशा-निर्देश।
READ ALSO  नए ड्राइविंग लाइसेंस के नियम 1 जून से प्रभावी होंगे: निजी प्रशिक्षण केंद्रों में अब परीक्षण की अनुमति

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि जब तक ये मंडियां मानवीय मानकों और बुनियादी ढांचे (जैसे उचित आश्रय और पानी की सुविधा) को पूरा नहीं करतीं, तब तक उनके “अवैध कामकाज” पर रोक लगाई जाए।

जस्टिस ज़ियाद रहमान ए.ए. और जस्टिस के.वी. जयकुमार की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित पक्षों को नोटिस जारी किया है:

  1. केंद्र सरकार
  2. केरल राज्य सरकार
  3. भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड (AWBI)
  4. पेरुंबावुर नगरपालिका
READ ALSO  हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय को प्रवेश न देने पर छात्र को 50,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया

हाईकोर्ट ने इन अधिकारियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और मंडियों को विनियमित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 मई को तय की गई है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles