बंगाल चुनाव: वोटर लिस्ट से नाम हटाने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार, याचिकाकर्ताओं को ट्रिब्यूनल जाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के उन व्यक्तियों की याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद अपने नाम हटाए जाने को चुनौती दी थी। इन याचिकाकर्ताओं में चुनाव ड्यूटी पर तैनात 65 कर्मचारी भी शामिल हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे मतदाता सूची से नाम हटाने या बाहर किए जाने के खिलाफ अपील तय करने के लिए गठित विशेष अपीलीय ट्रिब्यूनल से संपर्क करें।

शीर्ष अदालत कुल 77 व्यक्तियों से जुड़ी दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह था कि मतदाता सूची से नाम हटाना पूरी तरह से “मनमाना” था। उनके वकील ने तर्क दिया कि यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है क्योंकि नामों को हटाने से पहले याचिकाकर्ताओं को कोई ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी नहीं किया गया था।

मामले का एक गंभीर पहलू उन 65 याचिकाकर्ताओं से जुड़ा था जो वर्तमान में राज्य में चुनाव ड्यूटी पर तैनात हैं। उनके वकील ने पीठ के समक्ष दलील दी कि चुनाव ड्यूटी के लिए जारी आधिकारिक आदेशों में उनके मतदाता पहचान पत्र (EPIC) नंबर दर्ज थे, जिन्हें बाद में सूची से हटा दिया गया।

वकील ने तर्क दिया, “अब चुनाव ड्यूटी पर तैनात लोग खुद वोट नहीं दे पाएंगे। यह स्पष्ट रूप से मनमाना कदम है।” याचिका में चुनाव आयोग को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि जिन लोगों की अपीलें लंबित हैं, उन्हें चल रहे बंगाल चुनावों में मतदान करने की अनुमति दी जाए।

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सुप्रीम कोर्ट ने रुख अपनाया कि इन शिकायतों के लिए सही मंच अपीलीय ट्रिब्यूनल प्रणाली ही है। पीठ ने कहा, “आपको ये दलीलें (अपीलीय) ट्रिब्यूनल के सामने रखनी होंगी।” कोर्ट ने यह भी भरोसा दिलाया कि ट्रिब्यूनल द्वारा उचित आदेश पारित किए जाएंगे।

हालांकि अदालत ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा, “हम मतदाता सूची में बने रहने के अधिक मूल्यवान अधिकार की जांच करेंगे,” लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सक्रिय चुनावी चक्र के दौरान न्यायिक हस्तक्षेप की अपनी सीमाएं हैं।

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पीठ ने अपने 13 अप्रैल के आदेश का हवाला दिया, जिसमें प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग किया गया था। उस निर्देश के अनुसार:

  • अपीलीय ट्रिब्यूनल को चरण के अनुसार 21 अप्रैल या 27 अप्रैल तक अपीलों पर निर्णय लेना होगा।
  • चुनाव आयोग उन मतदाताओं को शामिल करने के लिए एक पूरक संशोधित मतदाता सूची जारी करेगा जिनकी अपील ट्रिब्यूनल ने स्वीकार कर ली है।
  • अदालत ने यह भी साफ किया कि “अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील लंबित होने मात्र से किसी व्यक्ति को मतदान का अधिकार नहीं मिल जाता।”
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विशेष गहन संशोधन (SIR) के कारण बड़ी संख्या में आई अपीलों को देखते हुए, कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 19 ट्रिब्यूनल गठित किए हैं। इन ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और जजों द्वारा की जा रही है ताकि मामलों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित हो सके।

पश्चिम बंगाल में वर्तमान में बहु-चरणों में चुनाव हो रहे हैं। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हो चुका है, जबकि अंतिम चरण 29 अप्रैल को निर्धारित है। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

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