लॉरेंस बिश्नोई पर बनी डॉक्यूसीरीज के रिलीज पर केंद्र की रोक; दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई टाली

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन पर आधारित बहुचर्चित डॉक्यूसीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ के प्रसारण पर रोक लगा दी है। यह सीरीज 27 अप्रैल को ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 (Zee5) पर रिलीज होने वाली थी।

यह जानकारी शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस पुरुषइंद्र कुमार कौरव की पीठ के समक्ष दी गई। अदालत बिश्नोई द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने अपने ऊपर बनी इस सीरीज के रिलीज को रोकने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान ज़ी5 के वकील ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने रिलीज से कुछ घंटे पहले ही एक औपचारिक एडवायजरी जारी की है।

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प्लेटफ़ॉर्म के वकील ने कहा, “सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अब हमें एक एडवायजरी जारी कर इसे रिलीज न करने की सलाह दी है। मंत्रालय ने दोपहर 12 बजे यह निर्देश जारी किया है।”

इस घटनाक्रम के बाद, जस्टिस कौरव ने सरकार की एडवायजरी और वस्तुस्थिति की समीक्षा करने के लिए बिश्नोई की याचिका पर सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी।

केंद्र सरकार का यह कदम पंजाब पुलिस की उस कड़ी सिफारिश के बाद आया है, जिसमें इस सीरीज के कंटेंट पर आपत्ति जताई गई थी। पंजाब पुलिस के साइबर क्राइम डिवीजन ने हाल ही में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव को पत्र लिखकर ज़ी5 को इस शो के प्रसारण से रोकने का आग्रह किया था।

पुलिस ने अपनी दलील में कहा कि इस तरह के कंटेंट से “सार्वजनिक व्यवस्था (पब्लिक ऑर्डर) को गंभीर खतरा” पैदा हो सकता है। अधिकारियों ने चिंता जताई कि यह डॉक्यूसीरीज अपराधी के जीवन का महिमामंडन कर सकती है, जिससे युवाओं के प्रभावित होने और उनके आपराधिक गतिविधियों की ओर आकर्षित होने का जोखिम बढ़ सकता है।

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ज़ी5 और इस सीरीज के निर्माताओं के अनुसार, ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ का उद्देश्य आपराधिक पहचान के उभार का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन करना था। प्लेटफॉर्म ने इस शो को छात्र राजनीति, संगीत उद्योग, विचारधारा और मीडिया की भूमिका के माध्यम से अपराधीकरण के इकोसिस्टम को समझने वाली एक “केस स्टडी” के रूप में पेश किया था।

वर्तमान में गुजरात की जेल में बंद 33 वर्षीय लॉरेंस बिश्नोई कई बड़े आपराधिक मामलों में मुख्य आरोपी है। वह मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले में भी प्रमुख अभियुक्तों में से एक है।

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अब हाईकोर्ट सोमवार को इस मामले में आगे की कार्रवाई और सरकार की एडवायजरी के कानूनी पहलुओं पर विचार करेगा।

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