दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ‘द ललित’ होटल का लाइसेंस रद्द, एनडीएमसी की ₹1,063 करोड़ के बकाए की मांग को दी मंजूरी

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए होटल ‘द ललित’ की संचालक कंपनी ‘भारत होटल्स लिमिटेड’ के साथ लाइसेंस समझौता रद्द करने के नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) के निर्णय पर मुहर लगा दी है। इसके साथ ही, कोर्ट ने लाइसेंस शुल्क के बकाया के रूप में ₹1,063 करोड़ से अधिक की मांग को भी वैध ठहराया है।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के दिसंबर 2023 के उस आदेश को पलट दिया है, जिसमें एनडीएमसी के नोटिस और लाइसेंस रद्द करने के फैसले को खारिज कर दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन में जनता के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

यह मामला 1973 से शुरू होता है जब भारत सरकार ने बाराखंभा लेन स्थित जमीन को क्षेत्र के पुनर्विकास के लिए एनडीएमसी को आवंटित किया था। 22 अप्रैल, 1982 को एनडीएमसी और भारत होटल्स के बीच एक 5-सितारा होटल और दो व्यावसायिक टावरों के निर्माण के लिए 99 साल का लाइसेंस समझौता हुआ। उस समय वार्षिक लाइसेंस शुल्क ₹1.45 करोड़ तय किया गया था।

समझौते के अनुसार, 33 वर्षों के बाद लाइसेंस शुल्क की समीक्षा का प्रावधान था। इसी आधार पर एनडीएमसी ने संपत्ति का मूल्यांकन कराया और 13 फरवरी, 2020 को भारत होटल्स को ₹10,63,74,59,852 (लगभग ₹1,063.74 करोड़) के भुगतान का नोटिस जारी किया। भुगतान न होने और अन्य उल्लंघन के चलते उसी दिन लाइसेंस रद्द करने और 90 दिनों के भीतर परिसर खाली करने का आदेश दिया गया था।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस बात पर जोर दिया कि एनडीएमसी जैसी संस्थाएं सार्वजनिक भूमि से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए बाध्य हैं। कोर्ट ने पाया कि भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने खुद एनडीएमसी से ₹162 करोड़ से अधिक का संशोधित ग्राउंड रेंट मांगा था, जबकि पुराने समझौते के कारण होटल से बहुत कम शुल्क मिल रहा था।

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कोर्ट ने कहा कि समझौते की वह धारा, जो शुल्क वृद्धि को 100% तक सीमित करती थी, मौजूदा कानून के विरुद्ध है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की:

“नई दिल्ली में जमीन सबसे दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों में से एक है… यदि इस तरह की जमीन से संबंधित किसी भी लेनदेन के कारण एनडीएमसी को भारी नुकसान होता है, तो उसका बोझ अंततः करदाताओं पर पड़ता है। हमारी राय में, ऐसे लेनदेन को मंजूरी नहीं दी जा सकती, अन्यथा यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा।”

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वित्तीय विवाद के अलावा, हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि भारत होटल्स ने लाइसेंस समझौते की शर्तों का ‘मौलिक उल्लंघन’ किया है। कोर्ट के अनुसार, ‘सब-लाइसेंसिंग’ (जमीन को आगे किसी और को देने) से संबंधित नियमों का उल्लंघन किया गया, जिसके कारण एनडीएमसी द्वारा लाइसेंस रद्द करना पूरी तरह उचित है।

यह फैसला एनडीएमसी के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है, जिससे उसे अपनी बेशकीमती संपत्तियों से बाजार दरों के अनुसार राजस्व वसूलने में मदद मिलेगी।

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