2006 मालेगांव विस्फोट मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने चार आरोपियों को किया बरी, विशेष अदालत का आदेश रद्द

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को 2006 के मालेगांव सीरियल ब्लास्ट मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को बरी (डिस्चार्ज) कर दिया है। अदालत ने उस विशेष अदालत के आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत इन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। लगभग दो दशक पुराने इस मामले में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है। बता दें कि इस त्रासदी में 31 लोगों की जान गई थी और नासिक जिले के इस औद्योगिक शहर में 300 से अधिक लोग घायल हुए थे।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायूमूर्ति श्याम चांडक की खंडपीठ ने राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवरिया और लोकेश शर्मा द्वारा दायर अपीलों को स्वीकार कर लिया। इन चारों ने विशेष एनआईए (NIA) अदालत के सितंबर 2023 के उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और कड़े यूएपीए (UAPA) कानून के तहत आरोप तय किए गए थे।

यह घटना 8 सितंबर, 2006 की है, जब मालेगांव में चार सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था। तीन विस्फोट हमीदिया मस्जिद और बड़ा कब्रिस्तान के परिसर में जुमे की नमाज के ठीक बाद हुए थे, जबकि चौथा धमाका मुशावरत चौक पर हुआ था। इन आतंकी हमलों में कुल 31 लोग मारे गए थे और 312 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

पिछले 18 वर्षों में इस मामले की जांच ने कई करवटें लीं:

  • शुरुआती जांच: महाराष्ट्र एटीएस (ATS) ने शुरू में मामले की जांच की और नौ मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया था।
  • एनआईए का हस्तक्षेप: जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जांच संभाली, तो उसने दावा किया कि ये विस्फोट दक्षिणपंथी चरमपंथियों की साजिश थे।
  • आरोपियों की रिहाई: एनआईए की जांच के बाद, एटीएस द्वारा पकड़े गए नौ मुस्लिम युवकों को विशेष अदालत ने बरी कर दिया था। इसके बाद एनआईए ने चौधरी, सिंह, नरवरिया और शर्मा को गिरफ्तार किया।
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सितंबर 2023 में विशेष अदालत ने इन चारों के खिलाफ आरोप तय कर मुकदमे को आगे बढ़ाने का फैसला किया था। हालांकि, आरोपियों ने तुरंत हाईकोर्ट का रुख किया और दलील दी कि एनआईए उनके खिलाफ कोई भी पुख्ता सबूत पेश करने में विफल रही है। उनका तर्क था कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य उन्हें साजिश या विस्फोटों से जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

इस साल जनवरी में, हाईकोर्ट ने उनकी याचिकाओं को स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने तब माना था कि इस मामले में हस्तक्षेप की आवश्यकता है। बुधवार को सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने आरोपियों की दलीलों को स्वीकार करते हुए उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया। कोर्ट ने फिलहाल फैसले का मुख्य हिस्सा (ऑपरेटिव पार्ट) सुनाया है, जबकि विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा।

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