‘फ्लाइट रिस्क’ के तर्कों के बीच पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर गुवाहाटी हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मंगलवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। यह मामला कई पासपोर्ट रखने, विदेशों में अघोषित संपत्ति और फर्जीवाड़े के आरोपों से जुड़ा है।

जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल पीठ ने करीब तीन घंटे तक चली लंबी सुनवाई के बाद यह निर्णय लिया। इस दौरान अदालत ने बचाव पक्ष द्वारा लगाए गए “राजनीतिक प्रतिशोध” के दावों और अभियोजन पक्ष की उस दलील पर विचार किया जिसमें खेड़ा को “फ्लाइट रिस्क” (देश छोड़कर भागने का खतरा) बताया गया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने खेड़ा का पक्ष रखते हुए कहा कि कांग्रेस नेता के देश छोड़कर भागने का कोई खतरा नहीं है और इस मामले में उनकी गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं है। सिंघवी ने तर्क दिया कि यह कानूनी कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है, खासकर राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर। उन्होंने मुख्यमंत्री सरमा द्वारा खेड़ा के आरोपों पर दी गई सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं का हवाला देते हुए इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया।

दूसरी ओर, असम के महाधिवक्ता देबजीत लोन सैकिया ने किसी भी प्रकार की राहत दिए जाने का कड़ा विरोध किया। महाधिवक्ता ने पीठ के समक्ष दलील दी कि यह मामला केवल मानहानि का नहीं है, बल्कि इसमें दस्तावेजों की धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

सैकिया ने अदालत में कहा, “यह कोई साधारण मानहानि का मामला नहीं है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच का मुख्य आधार धोखाधड़ी और मूल्यवान प्रतिभूतियों व टाइटल डीड्स की जालसाजी है। कांग्रेस प्रवक्ता को “फ्लाइट रिस्क” बताते हुए महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि खेड़ा इस स्तर पर गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा के हकदार नहीं हैं।

READ ALSO  दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के बार-बार तबादले पर डीएचसीबीए की चिंता, पारदर्शिता की मांग

यह पूरा विवाद पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए उन आरोपों से शुरू हुआ था जिसमें उन्होंने दावा किया था कि रिनिकी भूइयां शर्मा के पास एक से अधिक पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इसके जवाब में शर्मा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में आपराधिक मामला दर्ज कराया था।

एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • धारा 318: धोखाधड़ी (Cheating)
  • धारा 337, 338 और 340: रिकॉर्ड की जालसाजी, मूल्यवान प्रतिभूतियों का फर्जीवाड़ा और जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करना।
  • धारा 175: चुनाव के संबंध में झूठा बयान देना।
  • धारा 352 और 356: शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान और मानहानि।
READ ALSO  इलाहाबाद हाईकोर्ट: अदालत के बाहर जाली दस्तावेजों और बाद में कार्यवाही में दायर किए गए दस्तावेजों के लिए एफआईआर पर धारा 195(1)(बी)(ii) सीआरपीसी के तहत कोई रोक नहीं"

खेड़ा ने सोमवार को अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले, तेलंगाना हाईकोर्ट ने उन्हें सात दिनों की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी।

दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब यह देखना होगा कि अदालत उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करती है या नहीं।

READ ALSO  आशीष मिश्रा पर लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में हत्या का मुक़दमा चलेगा, यूपी कोर्ट ने आरोप तय किए
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles