HAMA के तहत गोद लिए गए बच्चों के स्थानांतरण के लिए CARA ‘NOC’ देने से इनकार नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) को हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम (HAMA), 1956 के तहत गोद लिए गए एक नाबालिग बच्चे के विदेश स्थानांतरण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2021 के दत्तक ग्रहण नियमों से पहले HAMA के तहत संपन्न हुए गोद लेने के मामलों में, CARA केवल “सपोर्ट लेटर” जारी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता, बल्कि उसे ‘हेग कन्वेंशन’ की आवश्यकताओं का पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

दिल्ली हाईकोर्ट में उन दत्तक माता-पिता द्वारा याचिका दायर की गई थी, जो अपने बच्चे को कनाडा ले जाने के लिए CARA द्वारा NOC देने से इनकार किए जाने से व्यथित थे। हाईकोर्ट ने निर्णय दिया कि दत्तक ग्रहण (संशोधन) विनियम, 2021 और 2022 के नियमों के तहत, HAMA के तहत गोद लिए गए बच्चों के स्थानांतरण की सुविधा के लिए विदेशी अधिकारियों के साथ संपर्क करना CARA का वैधानिक कर्तव्य है। कोर्ट ने CARA को हेग कन्वेंशन के तहत अपने दायित्वों को पूरा करने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा किया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एक नाबालिग बच्ची (याचिकाकर्ता नंबर 1) से संबंधित है, जिसका जन्म 2018 में हुआ था और जिसे सितंबर 2019 में सिख रीति-रिवाजों के अनुसार याचिकाकर्ता नंबर 2 और 3 (दत्तक माता-पिता) द्वारा गोद लिया गया था। याचिकाकर्ता नंबर 2 कनाडा में स्थायी निवासी का दर्जा रखने वाली भारतीय नागरिक हैं, जबकि याचिकाकर्ता नंबर 3 कनाडा के नागरिक और ओसीआई (OCI) कार्डधारक हैं।

फरवरी 2021 में HAMA के तहत गोद लेने की डीड निष्पादित होने के बाद, माता-पिता ने बच्चे को कनाडा ले जाने की प्रक्रिया शुरू की। उन्होंने 2021 के नियमों के विनियम 22B के तहत आवेदन किया। जिला मजिस्ट्रेट, फिरोजपुर ने अप्रैल 2022 में आवश्यक सत्यापन रिपोर्ट प्रदान की, लेकिन CARA ने NOC के बजाय नवंबर 2022 में एक “सपोर्ट लेटर” जारी किया। इसके बाद, CARA पोर्टल पर आवेदन को “अस्वीकृत” (Rejected) दिखाते हुए टिप्पणी की गई: “मामले को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता क्योंकि यह HAMA से संबंधित है।”

पक्षों की दलीलें

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुश्री नंदिता राव ने तर्क दिया कि विनियम 22B के तहत, एक बार जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, CARA NOC जारी करने के लिए बाध्य था, विशेष रूप से क्योंकि कनाडा 1993 के हेग कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता है। उन्होंने दलील दी कि NOC देने से इनकार करना “बच्चे के सर्वोत्तम हित” के सिद्धांत के खिलाफ है।

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दूसरी ओर, उत्तरदाताओं (भारत संघ और CARA) ने तर्क दिया कि यह दत्तक ग्रहण 2021 के नियमों के अधिसूचित होने से पहले हुआ था। उन्होंने दावा किया कि दत्तक माता-पिता हेग कन्वेंशन के अनुच्छेद 5 और 17 के तहत आवश्यक प्रमाण पत्र जमा करने में विफल रहे। इसके अलावा, CARA ने तर्क दिया कि उसका अधिकार क्षेत्र केवल किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत गोद लेने के मामलों तक सीमित है, और HAMA के तहत गोद लेना उसके दायरे से बाहर है।

हाईकोर्ट का विश्लेषण

जस्टिस सचिन दत्ता ने 2021 के नियमों के अध्याय IV-A का परीक्षण किया, जिसका शीर्षक है “उन माता-पिता द्वारा हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम, 1956 के तहत गोद लिए गए बच्चों के लिए प्रक्रिया जो बच्चे को विदेश ले जाना चाहते हैं।” हाईकोर्ट ने पाया कि नियमों की भाषा “स्पष्ट” है और इसका उद्देश्य उन स्थितियों को नियंत्रित करना है जहां माता-पिता HAMA के तहत गोद लिए गए बच्चे को स्थानांतरित करना चाहते हैं।

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विनियम 22B(2) और (3) का उल्लेख करते हुए, हाईकोर्ट ने नोट किया कि सत्यापन प्राप्त होने के बाद, हेग कन्वेंशन के प्रावधानों का पालन करना CARA की जिम्मेदारी है। जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी की:

“इस प्रकार, CARA के लिए केवल एक सपोर्ट लेटर जारी करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना तर्कहीन है, जबकि उसे प्राप्तकर्ता देश के संबंधित अधिकारियों के साथ मामले को आगे बढ़ाना चाहिए और औपचारिकताओं के समापन पर NOC जारी करना चाहिए।”

हाईकोर्ट ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि HAMA दत्तक ग्रहण CARA के अधिकार क्षेत्र से बाहर है:

“नियमों की भाषा में किसी भी तरह के संदेह की गुंजाइश नहीं है कि वे 2021 के नियमों के प्रारंभ होने से पहले HAMA, 1956 के तहत संपन्न हुए दत्तक ग्रहणों के संबंध में CARA पर दायित्व डालते हैं… नियम स्पष्ट रूप से आदेश देते हैं कि ऐसी स्थिति में, CARA हेग कन्वेंशन के अनुच्छेद 5 और/या 17 के प्रावधानों का ‘पालन करेगा’ (shall comply)।”

हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि CARA और कनाडाई अधिकारियों के बीच पत्राचार अधिकारियों के बीच एक “गलतफहमी” को दर्शाता है। ईमेल से संकेत मिला कि CARA अधिकारियों ने पूछा था कि क्या HAMA दत्तक ग्रहण को “उल्टा/रद्द” किया जा सकता है ताकि माता-पिता जेजे एक्ट (JJ Act) के तहत आगे बढ़ सकें, जिसे हाईकोर्ट ने लागू नियामक ढांचे के विपरीत पाया।

अदालत का निर्णय

हाईकोर्ट ने माना कि 2021 के नियमों से पहले HAMA के तहत गोद लिए गए बच्चों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना CARA का वैधानिक दायित्व है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि हेग कन्वेंशन का अनुच्छेद 7 केंद्रीय अधिकारियों को बच्चों की सुरक्षा के लिए सहयोग करने का आदेश देता है।

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हाईकोर्ट ने CARA को निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. कनाडाई अधिकारियों के साथ उचित संपर्क स्थापित करें और इस निर्णय में निर्धारित नियामक और वैधानिक स्थिति से उन्हें अवगत कराएं।
  2. कनाडाई अधिकारियों से औपचारिक रूप से अनुरोध करें कि हेग कन्वेंशन के अनुच्छेद 5 और 17 के तहत निर्धारित प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा किया जाए।
  3. उपरोक्त प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद याचिकाकर्ताओं को NOC जारी करें।

हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि चूंकि CARA को गोद लेने की वैधता के संबंध में कोई आपत्ति नहीं है, इसलिए एजेंसी को बच्चे के सर्वोत्तम हित में उसके कनाडा स्थानांतरण को सक्रिय रूप से सुगम बनाना चाहिए।

मामले का विवरण:

  • केस शीर्षक: गुर कौर माइनर व अन्य बनाम भारत संघ व अन्य
  • केस नंबर: W.P.(C) 16096/2024
  • पीठ: जस्टिस सचिन दत्ता
  • तारीख: 20 अप्रैल, 2026

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