दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: पर्निया कुरैशी और उनकी बहन के वीजा आवेदन पर जल्द कार्रवाई करे केंद्र

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को निर्देश दिया है कि मीट निर्यातक मोइन अख्तर कुरैशी की बेटियों, पर्निया कुरैशी और सिल्विया मोइन के वीजा आवेदनों पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए। कोर्ट का यह आदेश पर्निया कुरैशी की उस लंबी कानूनी लड़ाई के बीच आया है, जिसमें उनकी ‘पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन’ (PIO) स्थिति को रद्द करने और ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया’ (OCI) कार्ड की पात्रता को चुनौती दी गई है।

अमेरिकी नागरिक पर्निया कुरैशी ने 2019 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने केंद्र के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उनकी PIO स्थिति रद्द कर दी गई थी और उन्हें OCI कार्ड देने से मना कर दिया गया था। सरकार ने 2018 के एक संचार का हवाला देते हुए कहा था कि ऐसे व्यक्ति जिनके माता-पिता, दादा-दादी या परदादा-परदादी कभी पाकिस्तानी नागरिक रहे हों, वे संशोधित कानूनी ढांचे के तहत OCI स्थिति के पात्र नहीं हैं।

पर्निया की भारतीय नागरिकता का इतिहास इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण है। उनका जन्म 1983 में पाकिस्तान में हुआ था। उनकी माँ उस समय पाकिस्तानी नागरिक थीं, जबकि पिता भारतीय थे। पर्निया ने 1995 में अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छोड़ दी और भारतीय नागरिक बन गईं। वह 12 वर्षों तक भारतीय नागरिक रहीं और फिर 2007 में अमेरिकी नागरिकता ले ली। इसके बाद, उन्हें 2008 में PIO कार्ड जारी किया गया था, जिसकी वैधता 2023 तक थी।

विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्र ने PIO और OCI योजनाओं का विलय कर दिया। पाकिस्तान में जन्म और माँ की पूर्व नागरिकता के कारण पर्निया को OCI का दर्जा देने से इनकार कर दिया गया।

जस्टिस सचिन दत्ता ने मामले की सुनवाई करते हुए इस बात पर गौर किया कि पर्निया कुरैशी वीजा के लिए नया आवेदन जमा करना चाहती हैं। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि FRRO इस आवेदन पर लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार बिना किसी देरी के विचार करे।

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पर्निया की बहन सिल्विया मोइन के मामले में कोर्ट ने और भी सख्त समय-सीमा तय की है। प्राधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सिल्विया के वीजा आवेदन पर आदेश की तारीख (20 अप्रैल) से 10 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) आवेदन पर प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाएगा और लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार याचिकाकर्ता को वीजा जारी करने का प्रयास करेगा।”

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केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील राजेश गोगना ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि पर्निया कुरैशी बिना किसी वैध परमिट के देश में रह रही हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता का पक्ष इसके विपरीत है। मार्च 2019 में हाईकोर्ट ने पर्निया की PIO स्थिति रद्द करने पर रोक लगा दी थी। उस समय कोर्ट ने माना था कि उनका 12 वर्षों तक एक प्रलेखित भारतीय नागरिक होना एक निर्विवाद तथ्य है।

फिलहाल, हाईकोर्ट का ताजा आदेश यह सुनिश्चित करता है कि जब तक OCI पात्रता के बड़े कानूनी सवालों का समाधान नहीं होता, तब तक पर्निया को मानक दिशा-निर्देशों के तहत वीजा प्राप्त करने का अधिकार बना रहे।

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