उसरी चट्टी हत्याकांड: मुख्तार अंसारी के कथित शूटर सरफराज की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कार्यवाही रोकने से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को मुख्तार अंसारी के कथित सहयोगी और शार्पशूटर सरफराज अंसारी उर्फ मुन्नी को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने गाजीपुर के चर्चित उसरी चट्टी हत्याकांड से जुड़े मामले में सरफराज के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार करते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी है।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर अपने खिलाफ चल रहे मुकदमे को खत्म करने की मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने स्पष्ट किया कि मामला अब उस चरण में पहुंच चुका है जहां ट्रायल कोर्ट में आरोप तय किए जा चुके हैं और मुख्य गवाह के बयान भी दर्ज हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में, कोर्ट ने कानूनी तौर पर कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया।

यह पूरा विवाद साल 2001 में पूर्वी उत्तर प्रदेश में हुए भीषण गैंगवॉर से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, उस वक्त ब्रजेश सिंह के गिरोह ने गाजीपुर के उसरी चट्टी में मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला किया था। इस गोलीबारी में कई लोग मारे गए थे, जिनमें मनोज राय नाम का व्यक्ति भी शामिल था। पिछले दो दशकों से मनोज राय को दूसरे गुट का सदस्य माना जाता रहा, जिसकी मौत क्रॉसफायर में हुई थी।

लेकिन साल 2023 में इस मामले में नया मोड़ आया, जब मनोज राय के पिता शैलेंद्र कुमार राय ने गाजीपुर के मोहम्मदाबाद थाने में नई एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे का बिहार के बक्सर से अपहरण किया गया था और मुख्तार अंसारी के गुर्गों ने उसकी हत्या कर दी थी। पिता का दावा है कि इस हत्या को उसरी चट्टी कांड का हिस्सा दिखाकर पेश किया गया था। जांच के दौरान सरफराज अंसारी का नाम सामने आया, जिसके बाद उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई और ट्रायल शुरू हुआ।

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) वी.के. शाही ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि 2001 की घटना और 2023 में दर्ज कराई गई एफआईआर पूरी तरह से अलग तथ्यों पर आधारित हैं। सरकारी वकील ने कहा कि वर्तमान मुकदमा कानूनी रूप से पूरी तरह सही है और इसे रद्द नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि घटना के इतने वर्षों बाद एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही करना न्यायोचित नहीं है।

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न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने अपने आदेश में ट्रायल कोर्ट की प्रगति का संज्ञान लिया। कोर्ट ने पाया कि न केवल इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, बल्कि ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप (charges) भी तय कर दिए हैं।

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि मुकदमा अब सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है और शिकायतकर्ता व मुख्य गवाह शैलेंद्र कुमार राय की गवाही भी दर्ज की जा चुकी है।

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हाईकोर्ट ने कहा, “ऐसी परिस्थितियों में, इस स्तर पर अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का कोई औचित्य नहीं है।”

इस फैसले के साथ ही अब निचली अदालत में आरोपी शार्पशूटर के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।

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