अलीगढ़ के अभिषेक गुप्ता हत्याकांड में पूजा शकुन पांडेय को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली सशर्त जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ के चर्चित व्यवसायी अभिषेक गुप्ता हत्याकांड में आरोपी पूजा शकुन पांडेय उर्फ पूर्व महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा भारती की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने सोमवार को यह आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि मामले में आरोपी के खिलाफ हत्या की साजिश में शामिल होने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। कोर्ट ने पांडेय को इस शर्त पर जमानत दी है कि वह चल रही जांच और अदालती कार्यवाही में पूरा सहयोग करेंगी।

यह मामला 26 सितंबर 2025 का है, जब बाइक शोरूम के मालिक अभिषेक गुप्ता की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वे बस से यात्रा कर रहे थे। दर्ज कराई गई प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने बस रोककर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि इस हत्याकांड के पीछे पूजा शकुन पांडेय और उनके पति का हाथ था और उन्होंने ही इसकी साजिश रची थी। पांडेय के खिलाफ मुख्य आधार के रूप में 27 सितंबर 2025 (हत्या के अगले दिन) उनके फोन से सह-आरोपी फैजल को की गई 11 कॉल का विवरण पेश किया गया था।

आवेदक (पूजा शकुन पांडेय) के वकील ने दलील दी कि अभियोजन का पूरा मामला केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) पर आधारित है। उन्होंने तर्क दिया कि कॉल डिटेल्स के अलावा ऐसा कोई भी निर्णायक सबूत मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आवेदक मृतक की हत्या की साजिश में शामिल थीं।

वहीं, सरकारी वकील ने इन कॉल्स की फ्रीक्वेंसी और समय का हवाला देते हुए इसे साजिश का हिस्सा बताया और जमानत का विरोध किया।

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मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपियों और साजिश के आरोपियों की भूमिका के बीच अंतर को रेखांकित किया। कोर्ट ने पाया कि गोली चलाने की मुख्य भूमिका सह-आरोपी फैजल और आसिफ की बताई गई है, जिनकी पहचान सीसीटीवी फुटेज से भी हुई है और उनके पास से हथियार भी बरामद हुए हैं।

पूजा शकुन पांडेय की भूमिका पर न्यायमूर्ति देशवाल ने टिप्पणी करते हुए कहा:

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“इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि गोली मारकर घायल करने की विशिष्ट भूमिका सह-आरोपी फैजल और आसिफ को सौंपी गई है, उनकी पहचान सीसीटीवी फुटेज में भी की गई है और सह-आरोपी फैजल और आसिफ की निशानदेही पर हथियार भी बरामद किए गए हैं और आवेदक को केवल साजिश की भूमिका सौंपी गई है, लेकिन उक्त साजिश में आवेदक की संलिप्तता दिखाने वाली कोई निर्णायक सामग्री नहीं है।”

कोर्ट ने यह भी संज्ञान में लिया कि आवेदक एक महिला है। अपराध की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्य और आरोपी की कथित संलिप्तता को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

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कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि आवेदक जमानत पाने की हकदार है। जमानत अर्जी को इस शर्त के साथ स्वीकार किया गया कि वह भविष्य में जांच और मुकदमे की प्रक्रिया में पूरी तरह सहयोग करेंगी।

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