केरल कृषि आयकर अधिनियम के तहत वैधानिक प्रावधान की कमी के कारण समामेलित कंपनी को नुकसान की भरपाई की अनुमति नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि केरल कृषि आयकर अधिनियम, 1991 के तहत कोई भी समामेलित (Amalgamated) कंपनी, समामेलित होने वाली (Amalgamating) कंपनी के संचित नुकसान की भरपाई का दावा तब तक नहीं कर सकती, जब तक कि इसके लिए कोई स्पष्ट वैधानिक प्रावधान न हो या समामेलन की प्रक्रिया के दौरान राज्य को अनिवार्य नोटिस न दिया गया हो।

जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने एस्पिनवाल एंड कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर पांच अपीलों के समूह को खारिज करते हुए केरल हाईकोर्ट के आदेशों को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता राज्य के कानून में ऐसा कोई प्रावधान दिखाने में विफल रहा जो इस तरह के ‘सेट-ऑफ’ की अनुमति देता हो, जबकि केंद्रीय आयकर अधिनियम, 1961 में इसके लिए विशिष्ट प्रावधान मौजूद हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

मुख्य अपील (सिविल अपील संख्या 7796/2012) नवंबर 2006 में मंजूर की गई एक समामेलन योजना से जुड़ी थी, जिसकी प्रभावी तिथि 1 जनवरी 2006 तय की गई थी। इस योजना के तहत ‘पुल्लनगोड रबर एंड प्रोड्यूस कंपनी लिमिटेड’ का विलय एस्पिनवाल एंड कंपनी लिमिटेड में कर दिया गया था।

विलय होने वाली कंपनी के बैलेंस शीट में भारी संचित नुकसान था। समामेलित कंपनी (अपीलकर्ता) ने इस नुकसान को अपनी आय के साथ समायोजित करने की अनुमति मांगी। उन्होंने समामेलन योजना की धारा 14.2 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि विलय होने वाली कंपनी के सभी नुकसान समामेलित कंपनी के नुकसान माने जाएंगे। हालांकि, केरल कृषि आयकर ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट ने इस दावे को पहले ही खारिज कर दिया था।

पक्षों की दलीलें

अपीलकर्ता की ओर से: अपीलकर्ता के वरिष्ठ वकील श्री एस. गणेश ने तर्क दिया कि केरल कृषि आयकर अधिनियम की धारा 54 के तहत, समामेलित कंपनी उत्तराधिकारी के रूप में नुकसान की भरपाई की हकदार है। उन्होंने डालमिया पावर लिमिटेड बनाम असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि यदि समामेलन योजना बिना किसी आपत्ति के मंजूर हो जाती है, तो उसकी सभी शर्तें, जिनमें नुकसान का हस्तांतरण भी शामिल है, अनिवार्य रूप से लागू होती हैं।

READ ALSO  न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने सरकारी आवास पर नकदी बरामदगी के मामले में इन-हाउस पैनल के अभियोग के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार किया 

प्रतिवादी की ओर से: राजस्व विभाग की ओर से वरिष्ठ वकील श्री पल्लव शिशोदिया ने कहा कि डालमिया पावर का मामला यहाँ लागू नहीं होता क्योंकि समामेलन प्रक्रिया के दौरान केरल राज्य को कोई नोटिस नहीं दिया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि केरल अधिनियम की धारा 12 के तहत नुकसान का लाभ केवल उसी ‘निर्धारिती’ (Assessee) को मिल सकता है जिसने वह नुकसान सहा हो। चूँकि विलय होने वाली कंपनी का अस्तित्व समाप्त हो चुका था और राज्य के कानून में केंद्रीय आयकर अधिनियम की धारा 72A जैसा कोई प्रावधान नहीं था, इसलिए यह लाभ हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट का विश्लेषण

सुप्रीम कोर्ट ने केरल कृषि आयकर अधिनियम, 1991 और आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों की तुलना की। पीठ ने उल्लेख किया कि 1961 के केंद्रीय अधिनियम की धारा 72A स्पष्ट रूप से समामेलन के मामलों में नुकसान को आगे ले जाने और उसे समायोजित करने की अनुमति देती है, लेकिन केरल के अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

READ ALSO  तेलंगाना हाईकोर्ट के जज पर ‘आपत्तिजनक आरोप’ लगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता व वकीलों को बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया

अपीलकर्ता द्वारा डालमिया पावर केस पर दी गई दलील पर कोर्ट ने कहा:

“1956 के अधिनियम के तहत कोर्ट द्वारा समामेलन योजना को मंजूरी दिए जाने से पहले राज्य सरकार को नोटिस जारी करने की न तो कोई वैधानिक आवश्यकता है और न ही ऐसा कोई नोटिस जारी किया गया था। इसलिए, यह कहना कि डालमिया पावर लिमिटेड का निर्णय अपीलकर्ता के मामले को कवर करता है, गलत है और इसे खारिज किया जाता है।”

पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि कंपनियों के कानून के तहत आयकर विभाग (केंद्र सरकार) को नोटिस देना अनिवार्य है, लेकिन राज्य कृषि आयकर अधिकारियों के लिए ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं थी। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने पाया कि केरल अधिनियम की धारा 12 के तहत नुकसान को अधिकतम आठ वर्षों तक ही आगे ले जाया जा सकता है, जबकि यहाँ दावा किया गया नुकसान इस समय सीमा से भी पुराना था।

अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि अपीलकर्ता मौजूदा राज्य कानून के तहत नुकसान की भरपाई के अपने दावे को सही साबित नहीं कर सका।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने बहाल किया पुराना प्रतीक चिह्न, कांच की दीवारें हटाने का निर्णय: CJI बी. आर. गवई के नेतृत्व में परंपरा की वापसी

“अपीलकर्ता के वकील केरल अधिनियम के तहत ऐसा कोई प्रावधान बताने में असमर्थ रहे, जिसके तहत समामेलित होने वाली कंपनी द्वारा झेले गए नुकसान को समामेलित कंपनी की आय के विरुद्ध समायोजित किया जा सके।”

इन आधारों पर कोर्ट ने अपीलों में कोई योग्यता नहीं पाई और उन्हें खारिज कर दिया।

केस विवरण

  • केस शीर्षक: एस्पिनवाल एंड कंपनी लिमिटेड बनाम इंस्पेक्टिंग असिस्टेंट कमिश्नर
  • केस संख्या: सिविल अपील संख्या 7796/2012 (संबंधित मामलों के साथ)
  • पीठ: जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई
  • दिनांक: 13 अप्रैल, 2026

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles