सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु के मंत्री और डीएमके महासचिव दुरई मुरुगन को एक बड़ी राहत देते हुए, उनके खिलाफ चल रहे आय से अधिक संपत्ति के मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली मुरुगन की याचिका पर तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें उनके और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को दोबारा शुरू करने का निर्देश दिया गया था।
पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “अगली सुनवाई तक आगे की कोई कार्यवाही नहीं होगी। नोटिस जारी किया जाता है, जिसका जवाब 20 अप्रैल तक देना होगा।”
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में मुरुगन का पक्ष रखते हुए ट्रायल पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने पीठ को बताया कि उनके मुवक्किल को एक अन्य समान मामले में भी राहत मिल चुकी है। सिंघवी ने दलील दी कि जब तक शीर्ष अदालत हाईकोर्ट के हस्तक्षेप की समीक्षा कर रही है, तब तक आरोपों को तय करने (framing of charges) की प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए।
यह पूरा मामला दुरई मुरुगन द्वारा 1996 से 2001 के बीच, जब वे लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री थे, कथित तौर पर आय के ज्ञात स्रोतों से 3.92 करोड़ रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित करने से जुड़ा है।
इस मामले का इतिहास काफी लंबा और जटिल रहा है:
- 2002: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पहली बार मामला दर्ज किया गया।
- 2007: वेल्लोर की एक विशेष अदालत ने मुरुगन, उनकी पत्नी डी. संथाकुमारी, बेटे डी.एम. कथिर आनंद (वेल्लोर से वर्तमान लोकसभा सांसद) और अन्य को सबूतों के अभाव में बरी (discharge) कर दिया था।
- 2012: सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने इस फैसले को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी।
- 2023: 23 अप्रैल को मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस वेलमुरुगन ने 2007 के आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत को निर्देश दिया कि वह छह महीने के भीतर रोजाना सुनवाई कर इस मामले का निपटारा करे।
हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ मुरुगन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद वेल्लोर की विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही पर कम से कम 20 अप्रैल तक के लिए रोक लग गई है।

