रोहिणी कोर्ट में जज-वकील विवाद के बाद दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन: डिस्ट्रिक्ट जज राकेश कुमार-V हटाए गए, धीरज मित्तल नए न्यायाधीश नियुक्त

दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में न्यायाधीश और वकीलों के बीच हुए हालिया तीखे विवाद के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा फैसला लिया है। हाईकोर्ट ने एक त्वरित आदेश जारी कर उत्तर-पश्चिम जिले के डिस्ट्रिक्ट जज-04 राकेश कुमार-V का तबादला कर दिया है। उन्हें तत्काल प्रभाव से अदालत के न्यायिक कार्यों से हटाते हुए दिल्ली ज्यूडिशियल एकेडमी से संबद्ध किया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से 17 मई, 2026 को जारी आधिकारिक प्रशासनिक आदेश संख्या No.22/D-3/Gaz.IA/DHC/2026 के तहत दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा में यह फेरबदल किया गया है। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने वादियों और आम जनता की सहूलियत के लिए एक कड़ा निर्देश जारी किया है, जिसमें स्थानांतरित होने वाले अधिकारियों के लिए सुरक्षित फैसलों को सुनाने की एक अनिवार्य समय-सीमा तय की गई है।

घटनाक्रम: रोहिणी कोर्ट परिसर में जज और वकीलों के बीच तीखी झड़प

यह प्रशासनिक कार्रवाई रोहिणी कोर्ट परिसर में घटित एक गंभीर विवाद के तुरंत बाद सामने आई है। कोर्ट रूम में एक नियमित सुनवाई के दौरान डिस्ट्रिक्ट जज राकेश कुमार-V और उपस्थित अधिवक्ताओं के बीच तीखी बहस छिड़ गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह विवाद काफी बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच तीखे और अशोभनीय शब्दों का आदान-प्रदान हुआ। इसी दौरान एक अधिवक्ता ने कथित तौर पर न्यायाधीश को “नशेड़ी” तक कह दिया। कोर्ट रूम के भीतर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था और हाथापाई की स्थिति पैदा होने से पहले वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अदालत के स्टाफ ने बीच-बचाव कर मामले को संभाला।

बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति का तीखा विरोध

इस घटना के बाद वकीलों में रोष फैल गया, जिसके बाद दिल्ली की सभी जिला न्यायालय बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति (Coordination Committee) की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। बैठक के बाद समिति ने एक कड़ा विरोध प्रस्ताव जारी कर न्यायिक अधिकारी के व्यवहार की कड़ी निंदा की।

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समन्वय समिति ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा:

“दिल्ली की सभी जिला न्यायालय बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने शनिवार को हुई आपात बैठक में, सर्वसम्मति से और अत्यंत कड़े शब्दों में, डिस्ट्रिक्ट जज-04 राकेश कुमार-V (उत्तर-पश्चिम जिला, रोहिणी कोर्ट) के उस अत्यंत आपत्तिजनक, अशोभनीय और अस्वीकार्य आचरण की निंदा की है, जो उन्होंने सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता—जो रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं—के प्रति प्रदर्शित किया।”

समन्वय समिति ने प्रस्ताव पारित कर दोषी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की ताकि भविष्य में न्यायिक संस्था की गरिमा और प्रतिष्ठा को कोई ठेस न पहुंचे। साथ ही, समिति ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से भी अपील की कि वे जिला अदालतों में गरिमापूर्ण, निष्पक्ष और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए उचित सुधारात्मक और संस्थागत कदम उठाएं।

दिल्ली हाईकोर्ट का प्रशासनिक आदेश और स्थानांतरण

विवाद का संज्ञान लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रशासनिक स्तर पर कड़ा रुख अपनाया और तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण का आदेश जारी कर दिया। रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश के तहत निम्नलिखित प्रशासनिक फेरबदल किए गए हैं:

  1. श्री राकेश कुमार-V:
    • पूर्व पद: डिस्ट्रिक्ट जज-04, उत्तर-पश्चिम जिला, रोहिणी कोर्ट।
    • नवीन पद: उन्हें वर्तमान पद से हटाकर तत्काल प्रभाव से दिल्ली ज्यूडिशियल एकेडमी के डायरेक्टर के साथ डायवर्टेड क्षमता (diverted capacity) में संबद्ध (attach) कर दिया गया है।
  2. श्री धीरज मित्तल:
    • पूर्व पद: एडिशनल डायरेक्टर, दिल्ली ज्यूडिशियल एकेडमी (डायवर्टेड क्षमता में)।
    • नवीन पद: डिस्ट्रिक्ट जज-04, उत्तर-पश्चिम जिला, रोहिणी कोर्ट (उन्हें श्री राकेश कुमार-V के स्थान पर नियुक्त किया गया है)।
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सुरक्षित फैसलों (Reserved Judgments) पर हाईकोर्ट के कड़े निर्देश

न्यायिक प्रक्रिया में देरी को रोकने और वादियों के हितों की रक्षा के लिए हाईकोर्ट ने इस स्थानांतरण आदेश के साथ कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए हैं:

  • प्रशासनिक नियंत्रण: स्थानांतरित किए गए न्यायिक अधिकारी संबंधित जिले के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करेंगे।
  • लंबित फैसलों की घोषणा: स्थानांतरित होने वाले न्यायाधीश को अपना वर्तमान प्रभार छोड़ने से पहले उन सभी मुकदमों की सूची अधिसूचित करनी होगी जिनमें उन्होंने फैसले सुरक्षित (reserve) रख लिए थे।
  • समय-सीमा का निर्धारण: हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि स्थानांतरण के बावजूद संबंधित न्यायाधीश को ऐसे सभी मामलों में तय तारीख पर या अधिकतम दो से तीन सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से फैसला सुनाना होगा।
  • पारदर्शिता और सूचना: फैसले सुनाने की तारीख को संबंधित कोर्ट की वाद सूची (Cause List), दिल्ली ज्यूडिशियल एकेडमी की वेबसाइट और जिला न्यायालयों के आधिकारिक वेब पोर्टल पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
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इस आदेश की प्रति दिल्ली के सभी जिला न्यायाधीशों, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और सभी संबंधित बार एसोसिएशनों को त्वरित अनुपालन और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।

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