राज्यसभा चुनाव पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट सख्त, सांसद अनुराग शर्मा और चुनाव आयोग को नोटिस जारी

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा के निर्विरोध निर्वाचन को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सांसद अनुराग शर्मा, भारतीय चुनाव आयोग (ECI), केंद्र और राज्य सरकार सहित चुनाव अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने अधिवक्ता विनय शर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों को 21 मई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह कानूनी विवाद हिमाचल प्रदेश की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए हुए चुनाव से जुड़ा है, जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा 9 मार्च को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए थे। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नामांकन दाखिल करते समय शर्मा चुनाव लड़ने के लिए पात्र नहीं थे और उन्होंने चुनावी नियमों का उल्लंघन किया है।

याचिका का मुख्य आधार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9A है। इस कानून के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार नामांकन के समय सरकार के साथ किसी सक्रिय अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) में शामिल है—चाहे वह माल की आपूर्ति के लिए हो या सरकारी कार्यों के निष्पादन के लिए—तो उसकी उम्मीदवारी अमान्य मानी जाती है।

जनहित याचिका में दावा किया गया है कि नामांकन के समय अनुराग शर्मा के पास राज्य सरकार के साथ सात सक्रिय अनुबंध थे। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इन अनुबंधों की मौजूदगी के कारण उनकी उम्मीदवारी तुरंत रद्द कर दी जानी चाहिए थी।

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इसके अलावा, याचिका में चुनाव अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि अधिकारी ने नामांकन पत्रों की उचित जांच नहीं की और कथित रूप से अपात्र होने के बावजूद शर्मा का नामांकन स्वीकार कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप वे निर्विरोध जीत गए। हाईकोर्ट द्वारा चुनाव आयोग और सरकार से जवाब मांगे जाने के बाद अब इस राज्यसभा चुनाव की वैधता पर कानूनी पेच फंस गया है।

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