असिस्टेंट रजिस्ट्रार पद के लिए PSU या शिक्षण अनुभव ‘राजकीय कार्यालय’ की श्रेणी में नहीं: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु स्पष्ट करते हुए कहा है कि पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSU), सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों और शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों का अनुभव असिस्टेंट रजिस्ट्रार पद की भर्ती के लिए “राजकीय कार्यालय” (Government Office) का अनुभव नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि “राजकीय कार्यालय” का अर्थ केवल उन कार्यालयों से है जो सीधे राज्य या केंद्र सरकार के नियंत्रण में हैं।

यह कानूनी विवाद उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय (केंद्रीयकृत) सेवा असिस्टेंट रजिस्ट्रार परीक्षा-2024 के लिए निर्धारित 7 साल के कार्य अनुभव की योग्यता को लेकर था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियोक्ता को पद की आवश्यकता के अनुसार “राजकीय कार्यालय” शब्द की सीमित व्याख्या करने की स्वतंत्रता है।

मामले की पृष्ठभूमि

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने 28 अगस्त 2024 को विज्ञापन संख्या A-5/E-1/2024 के माध्यम से असिस्टेंट रजिस्ट्रार पद के लिए आवेदन मांगे थे। उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (केंद्रीयकृत) सेवा नियमावली, 1975 के नियम 13 के तहत, अनिवार्य योग्यता इस प्रकार थी:

“किसी राजकीय कार्यालय या विश्वविद्यालय के कार्यालय में न्यूनतम 07 वर्ष का कार्य करने का अनुभव जिसके साथ अंग्रेजी तथा हिन्दी दोनों में आलेखन का ज्ञान तथा लेखा नियमों का ज्ञान हो”

राज्य सरकार द्वारा 19 जून 2025 को जारी एक स्पष्टीकरण में कहा गया था कि राजकीय कार्यालय से तात्पर्य राज्य सरकार के कार्यालय से है और उच्च शिक्षा के संस्थान भी सरकार द्वारा संचालित एवं नियंत्रित होने चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने अपनी उम्मीदवारी रद्द किए जाने को चुनौती दी थी, क्योंकि उनके पास इंडियन एयरलाइंस, यूपी पावर कॉरपोरेशन और विभिन्न स्कूलों में 7 साल का अनुभव था।

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हाईकोर्ट का विश्लेषण और टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के नियोक्ताओं की प्रकृति की जांच की ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि क्या वे “राजकीय कार्यालय” के मापदंडों को पूरा करते हैं।

PSU और सरकारी कंपनियों पर

गीता चंद्रा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मुख्य मामले में, याचिकाकर्ता ने इंडियन एयरलाइंस लिमिटेड में कार्य किया था। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की:

“यह याचिकाकर्ता का मामला हो सकता है कि इंडियन एयरलाइंस लिमिटेड एक सरकारी उपक्रम (State instrumentality) या सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है… लेकिन फिर भी सख्त व्याख्या में, यह ‘राज्य या संघ’ के तहत एक राजकीय कार्यालय नहीं है। नियोक्ता को पद की आवश्यकता के अनुसार ‘राजकीय कार्यालय’ शब्द की सीमित व्याख्या करने की स्वतंत्रता है।”

कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया:

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“किसी कर्मचारी को केवल तभी राजकीय कार्यालय का कर्मचारी माना जाएगा यदि उसका रोजगार सीधे राज्य या केंद्र सरकार के नियंत्रण में हो।”

इसी आधार पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड, उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के कर्मचारियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।

शिक्षण और संविदा कर्मियों पर

शिक्षकों के मामले में, हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग बनाम संदीप श्रीराम वारडे (2019) 6 SCC 362 का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि शिक्षण अनुभव को असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद के लिए प्रशासनिक अनुभव के रूप में नहीं माना जा सकता। वहीं, संविदा कर्मियों के लिए कोर्ट ने कहा:

“यह निर्विवाद है कि अनुबंध (contract) पर काम करने वाले व्यक्ति को सरकारी कार्यालय में नियमित कर्मचारी नहीं माना जा सकता।”

कोर्ट का निर्णय

हाईकोर्ट ने सेवाओं की प्रकृति के आधार पर परिणामों को वर्गीकृत किया:

  1. याचिकाएं खारिज: इंडियन एयरलाइंस, यूपी पावर कॉरपोरेशन, यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम, बीएसएनएल, भारतीय खाद्य निगम (FCI) और विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों की याचिकाएं खारिज कर दी गईं, क्योंकि ये स्वतंत्र इकाइयां या उपक्रम हैं, न कि राजकीय कार्यालय।
  2. शिक्षकों की राहत नहीं: प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की याचिकाएं भी खारिज कर दी गईं।
  3. AAI के मामले में निर्देश: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airports Authority of India) के कर्मचारियों के मामले में कोर्ट ने आदेश रद्द कर दिया, क्योंकि यह केंद्र सरकार का एक कार्यालय है। कोर्ट ने अधिकारियों को उनके दावों पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।
  4. स्पष्टीकरण हेतु रिमांड: तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (निजी) और डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के मामलों में, कोर्ट ने नए सिरे से आदेश पारित करने के लिए मामले को वापस भेज दिया ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियमावली में “विश्वविद्यालय” शब्द में निजी या डीम्ड विश्वविद्यालय शामिल हैं या नहीं।
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मामले का विवरण

  • केस टाइटल: गीता चंद्रा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (व संबद्ध मामले)
  • केस नंबर: रिट – ए नंबर 1732 ऑफ 2026
  • बेंच: न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी
  • दिनांक: 24 मार्च, 2026

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