केरल हाईकोर्ट ने अथिराप्पिल्ली और कल्लाल प्लांटेशन क्षेत्रों में हो रही अनानास की खेती को तुरंत रोकने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने इस इलाके को मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका वाला क्षेत्र बताते हुए मामले को गंभीर माना है।
मुख्य न्यायाधीश सुमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने प्लांटेशन कॉरपोरेशन ऑफ केरल, जो इस भूमि का पट्टाधारी है, को निर्देश दिया कि वह अनानास की खेती के खिलाफ दी गई आपत्तियों पर विचार कर निर्णय ले।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य के कृषि मंत्री पी. प्रसाद का नाम पक्षकारों की सूची से हटा दिया और मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च तय की।
वन्यजीव कार्यकर्ता एंजेल्स नायर द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि वन विभाग की आपत्ति और जारी किए गए स्टॉप मेमो के बावजूद प्लांटेशन क्षेत्र में अनानास की खेती जारी है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि वन विभाग और प्लांटेशन कॉरपोरेशन के बीच 1970 में हुआ 50 वर्ष का लीज समझौता छह साल पहले समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद खेती की गतिविधियां चल रही हैं।
याचिका में अनानास की एकल फसल को पर्यावरण के लिए नुकसानदेह बताते हुए कहा गया है कि इसमें भारी मात्रा में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग होता है, जो चलकुडी नदी में मिल सकते हैं।
इसके अलावा, इससे मिट्टी का कटाव, वन्यजीवों के प्राकृतिक भोजन और चारे में कमी तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि होने की आशंका जताई गई है। याचिका में कहा गया है कि नदी के प्रदूषण से करीब 30 लाख लोगों के स्वास्थ्य और क्षेत्र की जैव विविधता पर असर पड़ सकता है।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है और प्लांटेशन कॉरपोरेशन को आपत्तियों पर विचार कर उचित निर्णय लेने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी।

