CJI सूर्य कांत ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को लगाई फटकार, प्रक्रियागत खामियों और अधिकारियों की मनमानी की ‘गहन जांच’ की चेतावनी दी

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि कुछ अधिकारी कथित तौर पर अपनी “मनमर्जी” से काम कर रहे हैं और स्थापित न्यायिक प्रोटोकॉल की अनदेखी कर रहे हैं। प्रशासनिक खामियों पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए, CJI ने जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए रजिस्ट्री के कामकाज की “गहन जांच” (deep probe) के आदेश देने की अपनी मंशा जाहिर की।

ये टिप्पणियां CJI ने तब कीं जब उनके सामने प्रक्रियागत बाईपास का एक विशिष्ट उदाहरण आया, जिसे उन्होंने “चौंकाने वाला” बताया।

चिंता का विषय

स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए, CJI कांत ने एक विशेष मामले का उल्लेख किया जहां एक याचिका, जिसे तीन न्यायाधीशों की पीठ ने पहले ही खारिज कर दिया था, बाद में दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दी गई थी।

CJI ने टिप्पणी की, “मैं यह जानकर दंग रह गया कि एक याचिका, जिसे तीन जजों की बेंच ने खारिज कर दिया था, बाद में दूसरी बेंच के सामने लिस्ट कर दी गई।” उन्होंने संकेत दिया कि यह कोर्ट की आंतरिक लिस्टिंग प्रक्रियाओं का स्पष्ट उल्लंघन है।

READ ALSO  Supreme Court Directs States to Respond on Encroachment-Free Footpaths Across India

‘जज ट्रांजिट में हैं, अधिकारी स्थायी हैं’

CJI ने रजिस्ट्री के भीतर लंबे समय से कार्यरत अधिकारियों के आचरण पर विशेष आपत्ति जताई। उन्होंने देखा कि कुछ व्यक्ति, जो पिछले 20-30 वर्षों से रजिस्ट्री में तैनात हैं, ऐसा महसूस करते हैं कि वे न्यायिक निगरानी या प्रशासनिक सुधारों के दायरे से बाहर हैं।

CJI ने कहा, “मैं गहन जांच के आदेश दूंगा। रजिस्ट्री में ऐसे अधिकारी हैं जो पिछले 20-30 वर्षों से यहां हैं। उन्हें लगता है कि हम (जज) सभी यहां ट्रांजिट में हैं और वे स्थायी हैं। इसलिए, चीजें उसी तरह होनी चाहिए जैसा वे चाहते हैं।”

सुधार के प्रति प्रतिबद्धता

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि सरकारी कर्मचारी का ग्रहणाधिकार कब समाप्त हो जाता है

CJI ने जोर देकर कहा कि सुचारू कामकाज सुनिश्चित करने के लिए नए सुधार लाए जाने के बावजूद ये कार्य जारी हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रणालीगत मुद्दों को हल न करना उनके पेशेवर कर्तव्यों की विफलता होगी।

CJI कांत ने आगे कहा, “अगर मैं पद छोड़ने से पहले इसे ठीक नहीं करता हूं, तो मैं अपने कर्तव्यों में विफल हो जाऊंगा।” उन्होंने अपने कार्यकाल की समाप्ति से पहले सुधारात्मक उपाय करने का संकल्प लिया।

READ ALSO  महज़ दहेज की माँग धारा 498A के तहत अपराध नहीं, केवल आरोप उत्पीड़न साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं: दिल्ली हाई कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट हाल के दिनों में अपने प्रशासनिक विंग को आधुनिक बनाने और यह सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयास कर रहा है कि रजिस्ट्री न्यायिक प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करे, ताकि प्रशासनिक कर्मचारियों द्वारा किसी भी “कथित अतिक्रमण” को समाप्त किया जा सके।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles